चेन्नई : तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री और AIDMK के निष्कासित नेता ओ. पन्नीरसेल्वम (O Panneerselvam) ने अपना दल बदल कर DMK (द्रविड़ मुनेत्रा कड़गम) जॉइन कर लिया। चुनाव के समय तमिलनाडु में इंडिया (INDIA) गठबंधन की ताकत बढ़ गई।
इस दिन चेन्नई में DMK के मुख्यालय में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन (MK Stalin) के हाथ से पन्नीरसेल्वम ने पार्टी का झंडा लिया। मौके पर पार्टी के शीर्ष नेता और मंत्री भी मौजूद थे। DMK में शामिल होकर पन्नीरसेल्वम ने कहा कि AIDMK के साथ कड़वी अनुभवों के बाद काफी सोच-विचार करके यह फैसला लिया। दक्षिण तमिलनाडु का थेवर इलाका पन्नीरसेल्वम का मजबूत क्षेत्र है। यही वोट बैंक ध्यान में रखकर DMK ने यह निर्णय लिया है, ऐसा जानकार मानते हैं।
जयरललिता की मौत के बाद AIDMK में सत्ता संघर्ष शुरू हुआ। एक तरफ पन्नीरसेल्वम थे, जो जयरललिता के करीबी और तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनकी पार्टी में दावेदारी भी ज्यादा थी। दूसरी तरफ थे एडाप्पारी के. पलानीस्वामी। सत्ता को लेकर टकराव के कारण पार्टी दो हिस्सों में बंट गई और संगठन का नियंत्रण पलानीस्वामी के हाथ में चला गया। आखिरकार 2022 में पन्नीरसेल्वम को निष्कासित कर दिया गया।
इसके बाद पन्नीरसेल्वम ने ‘AIDMK वर्कर्स रिट्रीवल ऑर्गनाइजेशन’ नाम का अलग गुट बनाया और खुद को जयरललिता का असली उत्तराधिकारी बताया। लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हुआ। विधानसभा चुनाव से पहले AIDMK में लौटने की कोशिश भी की, लेकिन पलानीस्वामी राजी नहीं हुए। इसलिए उनके पास स्टालिन की पार्टी में शामिल होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
इस कदम का राजनीतिक महत्व भी है। चुनाव से पहले BJP AIDMK के सभी गुटों को एकजुट करना चाहती थी ताकि मिलकर स्टालिन को चुनौती दी जा सके। पन्नीरसेल्वम DMK में शामिल होकर इस योजना को विफल कर देते हैं। इस दिन पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा कि वह स्टालिन को ही मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। उनके शब्दों में DMK के सामने कोई नहीं है। स्टालिन ही मुख्यमंत्री होंगे।