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अचल संपत्ति बेचकर, 8 लाख रुपये कर्ज लेकर एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की, फिर भी बचा नहीं पाए…

रांची एयर एम्बुलेंस क्रैश: बीमार बेटे के साथ खत्म हुए परिवार के और 2 सदस्य।

By एलीना दत्त, Posted by: प्रियंका कानू

Feb 24, 2026 16:18 IST

रांची: अग्निग्रस्त बेटे की जान बचाने के लिए उन्होंने अपनी जमा पूंजी तक लगा दी। फिर भी खर्च नहीं उठा, कर्ज लेकर और आठ लाख रुपये जुटाए। प्लेन किराए पर लेकर बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाने की व्यवस्था की गई लेकिन इसके बावजूद भी आखिरी क्षण में कोई बच नहीं पाया। दिल्ली पहुंचने से पहले ही झारखंड में एयर एम्बुलेंस गिर गई। क्षण भर में परिवार का बीमार बच्चा और बाकी छह सदस्य भी मर गए।

सोमवार रात झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के कासारी जंगल में एक एयर एम्बुलेंस गिर गई, जिसमें मरीज समेत सात लोग मारे गए। 41 वर्षीय संजय कुमार को उस विमान में बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था। वे झारखंड के लातेहार जिले में चांदवार के एक ढाबे के मालिक थे। कुछ दिन पहले परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य एक दुर्घटना में आग से जल गए थे। उनके होटल में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी। संजय का शरीर 63 प्रतिशत जल गया था। उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ रही थी और स्थानीय अस्पताल में और इलाज संभव नहीं था। तब डॉक्टर की सलाह पर परिवार ने दिल्ली के सायर गंगाराम अस्पताल में ले जाने का निर्णय लिया लेकिन सड़क मार्ग से ले जाने की स्थिति नहीं थी इसलिए एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई।

मृतक के भाई अजय कुमार ने बताया कि उनके परिवार ने संजय के इलाज के लिए संपत्ति बेचकर और कर्ज लेकर एयर एम्बुलेंस का किराया जुटाया। दिल्ली के निजी अस्पताल में इलाज के खर्च के लिए भी मित्र और शुभचिंतकों से ऋण लिया। परिचितों का कहना है कि आखिरी क्षण तक संजय और उनके परिवार ने संघर्ष किया लेकिन आखिरी उम्मीद भी काम नहीं आई। सोमवार को संजय को रांची से दिल्ली के लिए रवाना किया गया, पत्नी अर्चना और उनके रिश्तेदार ध्रुव के साथ। साथ में थे डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और क्रू सदस्य। शाम 7:11 बजे रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी बीचक्राफ्ट किंग एयर BE9L मॉडल की एयर एम्बुलेंस। रात 10 बजे दिल्ली पहुंचने की योजना थी। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद एयर एम्बुलेंस कासारी जंगल में गिर गई।

डीजीसीए ने बताया कि रांची से उड़ान भरते ही मौसम खराब होने लगा। कोलकाता एयरपोर्ट से पायलट ने संपर्क किया और मार्ग बदलने का अनुरोध किया लेकिन शाम 7:34 बजे कोलकाता एयरपोर्ट से संपर्क टूट गया। तब वह वाराणसी से 100 नौटिकल मील दक्षिण-पूर्व में थे। लखनऊ एयर ट्रैफिक कंट्रोल से भी संपर्क नहीं हो पाया। रांची एयरपोर्ट के निदेशक विनोद कुमार का कहना है कि खराब मौसम के कारण यह हादसा हुआ। घटना की जांच शुरू हो गई है। संजय और उनके परिवार के दो सदस्य के अलावा पायलट-इन-कमांड कैप्टन विवेक विकास भगत और सह-पायलट कैप्टन सबराजदीप सिंह की भी मृत्यु हुई। इसके अलावा डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता और पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्र की भी मौत हुई।

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