कुवलय बंद्योपाध्याय
साढ़े आठ लाख पेड़ काटे जाएंगे। गलाथिया बे राष्ट्रीय उद्यान और कैंपबेल बे राष्ट्रीय उद्यान में रहने वाली कई प्रजातियों को स्थानिक यानी केवल उसी क्षेत्र में पाए जाने वाला माना गया है। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ कटने से इन जीवों के अस्तित्व पर संकट गहरा सकता है। इस इलाके की प्रकृति का बड़ा हिस्सा अब भी पूरी तरह खोजा नहीं गया है। वहां के जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के बारे में संपूर्ण जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
फिर भी राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद ग्रेट निकोबार परियोजना को हरी झंडी दे दी है। हालांकि 80 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना के कार्यान्वयन पर कई शर्तें भी लगाई गई हैं। एनजीटी की ईस्टर्न जोन बेंच ने स्पष्ट किया है कि शर्तों का उल्लंघन होने पर परियोजना का काम रोकने का आदेश दिया जाएगा। इसके बावजूद पर्यावरणविदों और प्राणीविज्ञानियों की चिंता कम नहीं हुई है। उनका मानना है कि 921 वर्ग किलोमीटर में फैले ग्रेट निकोबार द्वीप का भविष्य अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों के पालन पर निर्भर करेगा।
परियोजना में क्या-क्या शामिल है?
सूत्रों के अनुसार, ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत चार बड़े घटक होंगे :-
पहला, गलाथिया तट पर 7.66 वर्ग किमी क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बनाया जाएगा, जहां 20 फुट लंबे कंटेनरों के लगभग 1 करोड़ 60 लाख यूनिट रखने की क्षमता होगी। दूसरा, उसी तट के उत्तर-पूर्व में 8.45 वर्ग किमी क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाया जाएगा।तीसरा, तट के उत्तर-पश्चिम में 16 हजार 610 हेक्टेयर भूमि पर एक सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा। चौथा, 149.6 वर्ग किमी क्षेत्र में दो तटीय शहर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा लग्जरी पर्यटन रिसॉर्ट, क्रूज शिप टर्मिनल और औद्योगिक हब बनाने की भी योजना है। वर्तमान में इस क्षेत्र में भारतीय सेना की अंडमान और निकोबार कमांड के अधीन नौसेना अड्डा आईएनएस बाज मौजूद है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए अंडमान और निकोबार जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र का विकास आवश्यक माना जा रहा है।
पर्यावरणविद क्यों चिंतित हैं?
जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के एक वैज्ञानिक के अनुसार, छोटे आकार के बावजूद ग्रेट निकोबार में दो राष्ट्रीय उद्यान हैं, गलाथिया बे नेशनल पार्क और कैंपबेल बे नेशनल पार्क। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए करीब साढ़े आठ लाख पेड़ काटे जाने का अनुमान है। जिस क्षेत्र में कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल प्रस्तावित है, उससे लगभग 10 किलोमीटर दूर गलाथिया तट स्थित है। वहीं संकटग्रस्त लेदरबैक कछुआ, खारे पानी का मगरमच्छ और निकोबार मकाक जैसे जीव पाए जाते हैं।
2025 में निकोबार में इरविन्स वुल्फ स्नेक नामक सांप की एक नई प्रजाति की पहचान हुई, जो केवल इसी क्षेत्र में पाई जाती है। इसके अलावा कैंपबेल बे से ग्रेट निकोबार क्रेक नामक पक्षी प्रजाति के बारे में भी पर्याप्त वैज्ञानिक जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का आशंका है कि यदि परियोजना के क्रियान्वयन में जरा भी लापरवाही हुई या पर्यावरणीय शर्तों का उल्लंघन हुआ, तो ग्रेट निकोबार का पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय हित में महत्वपूर्ण इस परियोजना को लागू करते समय पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।