गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को गुवाहाटी में एक संग्रहालय परिसर की आधारशिला रखी, जहां ऐतिहासिक वृंदावनी वस्त्र को प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य की पहचान और विरासत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। 16वीं सदी का यह रेशमी वस्त्र वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के मार्गदर्शन में तैयार किया गया था। इसे 2027 से 18 महीने के लिए सार्वजनिक प्रदर्शन हेतु ब्रिटिश म्यूजियम द्वारा असम को उधार दिया जाएगा।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, समारोह के बाद सरमा ने कहा कि असम धीरे-धीरे अपनी गौरवशाली विरासत को वापस ला रहा है। गुवाहाटी के केंद्र में एक विश्वस्तरीय संग्रहालय बनाया जाएगा, जहां इस पवित्र वस्त्र को रखा जाएगा। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि भले ही सीमित समय के लिए सही लेकिन वृंदावनी वस्त्र को असम वापस लाने की दिशा में यह बड़ा कदम है।
सरमा ने जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन का आभार जताया, जिसने ब्रिटिश म्यूजियम के साथ समझौता कराने और गुवाहाटी में अंतरराष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय बनाने में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि सदियों बाद असम इस पवित्र रचना को अपनी धरती पर देख सकेगा। यह केवल शंकरदेव की विरासत को मातृभूमि में लाने का प्रयास नहीं है बल्कि असम की अपनी पहचान की रक्षा करने के संकल्प का भी प्रतीक है।
असम सरकार ने पिछले साल नवंबर में ब्रिटिश म्यूजियम के साथ ऋण समझौता किया था। यह पहली बार होगा जब एक सदी से अधिक समय पहले असम से बाहर ले जाए गए इस वस्त्र का कोई हिस्सा राज्य में प्रदर्शित किया जाएगा। इसके कुछ हिस्से वर्तमान में लंदन, पेरिस, बोस्टन और लॉस एंजिल्स के संग्रहालयों में सुरक्षित हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह वस्त्र तिब्बत के रास्ते असम से बाहर ले जाया गया था। वृंदावनी वस्त्र में भगवान कृष्ण के जीवन की झलक दिखाई गई है। इसे कोच राजा नर नारायण के अनुरोध पर बुना गया था और इसमें शंकरदेव द्वारा रचित पद भी शामिल हैं। ब्रिटिश म्यूजियम ने इस वस्त्र के एक हिस्से को 1904 में तिब्बत से प्राप्त किया था। इसकी लंबाई लगभग साढ़े नौ मीटर है और यह कई रेशमी पैनलों को जोड़कर बनाया गया है।