नई दिल्लीः दिल्ली आबकारी नीति मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा आम आदमी पार्टी के नेताओं को राहत मिलने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा (Pawan Khera) ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए उसे “इच्छाधारी नाग” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की एजेंसियों का इस्तेमाल चुनावी औजार की तरह किया जा रहा है।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को दिल्ली आबकारी नीति मामले में डिस्चार्ज कर दिया है।
पवन खेड़ा ने भाजपा को घेरा
खेड़ा ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा का मुख्य लक्ष्य “कांग्रेस मुक्त भारत” है। इसके लिए वह किसी भी स्तर तक जा सकती है। उन्होंने लिखा कि भाजपा का चरित्र “रूप बदलने वाला” है और चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मामलों में तेजी आ जाती है।
उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) का उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु चुनाव नजदीक होने के कारण उन्हें फिर से सुर्खियों में लाया जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में एयरसेल-मैक्सिस और INX मीडिया मामलों में चिदंबरम के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दाखिल की है।
खेड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा “एजेंसियों को कैंपेन टूल” की तरह इस्तेमाल करती है और इसे उन्होंने “BJP प्लेबुक” बताया।
सिसोदिया का दावा - ‘सच की जीत’
आबकारी मामले से बरी होने के बाद मनीष सिसोदिया ने इसे भारतीय राजनीति का महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ED और CBI के सहारे सत्ता में बने रहने की कोशिश की गई, लेकिन अदालत ने सच्चाई सामने ला दी।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सिसोदिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही टिप्पणी कर चुका था कि मामला ट्रायल में नहीं टिकेगा और अब ट्रायल कोर्ट ने भी यही कहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक CBI अधिकारी के खिलाफ जांच बैठाई गई है। भाजपा को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए। अरविंद केजरीवाल ने फैसले को “सत्य की विजय” और “भारत के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश” करार दिया।
भाजपा का आरोप
भाजपा नेता सुधांशु त्निवेदी ने कहा कि अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपमुक्त किया है, जो एक तकनीकी पहलू है। उन्होंने कहा कि CBI इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी और पार्टी विस्तृत अध्ययन के बाद आधिकारिक प्रतिक्रिया देगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरोप निराधार थे तो आरोप तय कैसे हुए।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कथित केंद्रीय साजिश की भूमिका को प्रमाणित नहीं किया जा सका। अदालत ने माना कि आरोप न्यायिक जांच में टिक नहीं पाए और मनीष सिसोदिया के खिलाफ “आपराधिक मंशा” का कोई प्रमाण नहीं मिला। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई अब इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देगी।
इस फैसले के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और आगामी चुनावी राज्यों के मद्देनजर यह मामला सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है।