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खामेनेई की हत्या पर सियासी घमासान: सोनिया का मोदी सरकार की चुप्पी पर सवाल, -'यह 'तटस्थता' नहीं,जिम्मेदारी से पलायन'

सोनिया गांधी की टिप्पणी को लेकर भाजपा के प्रकाश रेड्डी का तीखा हमला- कहा उनका बयान- ‘हास्यास्पद’

By डॉ अभिज्ञात

Mar 03, 2026 15:26 IST

नई दिल्ली/हैदराबाद: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की लक्षित हमले में मौत के बाद भारत की प्रतिक्रिया को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसे 'तटस्थता' नहीं, बल्कि 'जिम्मेदारी से पलायन' करार दिया है। वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को हास्यास्पद बताया है।

अपने एक लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या पर भारत की ओर से संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून की स्पष्ट रक्षा न किया जाना चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआती दौर में प्रधानमंत्री ने केवल ईरान की जवाबी कार्रवाई की निंदा की, जबकि उससे पहले की घटनाओं पर चुप्पी साधे रखी। बाद में ‘संवाद और कूटनीति’ की बात कही गई, जबकि उनके अनुसार यही प्रक्रिया हमलों से पहले जारी थी।

सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री की हालिया इज़राइल यात्रा के समय को भी प्रश्नों के घेरे में रखा और कहा कि वैश्विक दक्षिण, रूस और चीन जैसे ब्रिक्स साझेदारों ने दूरी बनाए रखी, जबकि भारत का रुख अलग दिखाई दिया। उन्होंने बजट सत्र के दूसरे चरण में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग भी की।

दूसरी ओर बीजेपी नेता प्रकाश रेड्डी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति स्पष्ट है और देश अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेता है। उन्होंने कहा कि भारत सभी देशों से मित्रता रखता है और जहां आवश्यक हो, वहां आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाता है। रेड्डी ने कांग्रेस से यह भी पूछा कि अक्टूबर 2023 में हमास द्वारा इज़राइली नागरिकों पर हमलों के समय उसका क्या रुख था।

उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के कई शहरों में सैन्य ठिकानों, वायु-रक्षा प्रणालियों और मिसाइल अड्डों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल तथा क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया।

इस घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित किया है, बल्कि भारत की विदेश नीति को लेकर घरेलू राजनीति में भी तीखी बहस छेड़ दी है।

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