नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों के बाद बिस्कुट निर्माता पारले प्रोडक्ट्स को उम्मीद है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष से पैकेजिंग सामग्री और मालभाड़ा (फ्रेट) की लागत बढ़ सकती है। पारले प्रोडक्ट्स के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने पीटीआई से कहा कि यदि क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो लागत में इजाफा होगा, जिसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, “हम मौजूदा स्थिति का असर दो लागत केंद्रों पर देख रहे हैं। पहला पैकेजिंग सामग्री है, जो कच्चे तेल से बनती है और दूसरा मालभाड़ा। हमारी उम्मीद है कि यह स्थिति ज्यादा लंबी न चले।” उन्होंने भारतीय कंपनियों पर इस संघर्ष के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर यह बात कही।
अन्य एफएमसीजी कंपनियों जैसे मैरिको और डाबर ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।
वहीं, वाहन निर्माता मारुति सुजुकी इंडिया ने कहा कि वह इस स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है, खासकर मध्य पूर्व क्षेत्र को होने वाले निर्यात पर संभावित असर को लेकर।
मासिक बिक्री आंकड़ों पर आयोजित कॉल के दौरान मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राहुल भारती ने कहा, “हम स्थिति पर करीबी नजर रख रहे हैं। हालांकि, निर्यात क्षेत्र के रूप में मध्य पूर्व में हमारी हिस्सेदारी बहुत अधिक नहीं है। उदाहरण के तौर पर, इस वर्ष यह हमारे कुल निर्यात का लगभग 12.5 प्रतिशत है।”
चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-फरवरी अवधि में मारुति सुजुकी इंडिया का कुल निर्यात 4,00,734 इकाइयों का रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 2,99,617 इकाइयां था।
भारती ने कहा कि कंपनी लगभग 100 देशों में निर्यात करती है और उसका पोर्टफोलियो विविध है, जिससे जोखिम कम होता है।
टाटा मोटर्स समूह के एक प्रवक्ता ने कहा, “यात्री वाहनों के मामले में हमारा मध्य पूर्व को कोई निर्यात नहीं है और वाणिज्यिक वाहनों का निर्यात भी बहुत अधिक नहीं है।”