नई दिल्ली : भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को बताया है कि उसके पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह साबित हो कि संभल की जामा मस्जिद किसी पुराने ढांचे को गिराकर बनाई गई थी या खाली जमीन पर बनी थी। विभाग के पास उस समय के जमीन मालिक से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं हैं।
यह जानकारी एक आरटीआई आवेदन के जवाब में दी गई। आवेदक सत्य प्रकाश यादव ने पूछा था कि मुगल काल की जामा मस्जिद क्या किसी खंडहर को तोड़कर बनाई गई थी या खाली जमीन पर। उन्होंने उस समय के जमीन मालिक का नाम और स्वामित्व से जुड़े कागजात भी मांगे थे।
एएसआई ने अपने जवाब में कहा कि उसके कार्यालय में ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। मस्जिद स्थल पर पहले किस तरह का निर्माण था, बाद में क्या नया निर्माण हुआ और क्या कोई विवाद जुड़ा रहा इन सवालों पर भी विभाग ने कहा कि उसके रिकॉर्ड में ऐसी जानकारी नहीं है।
हालांकि प्रथम अपील के दौरान एएसआई ने 2018 की एक घटना का जिक्र किया। विभाग ने बताया कि संरक्षित स्मारक क्षेत्र में नया निर्माण की अनुमति नहीं है। उस साल मस्जिद परिसर में एक स्टील रेलिंग लगाई जा रही थी जिसे अवैध मानते हुए काम रुकवाया गया था।
मस्जिद के निर्माण काल के बारे में एएसआई ने कहा कि उसके रिकॉर्ड के अनुसार जामा मस्जिद संभल का निर्माण 1526 में हुआ था। यह स्मारक 1920 से एएसआई के संरक्षण में है। वर्तमान में यह एक मस्जिद के रूप में मौजूद है।
सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि आरटीआई कानून के तहत केवल उपलब्ध रिकॉर्ड ही दिए जा सकते हैं। नई जानकारी तैयार करने के लिए विभाग को बाध्य नहीं किया जा सकता। आयोग ने एएसआई के जवाब को सही मानते हुए अपील खारिज कर दी।