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आंध्र प्रदेश रेयर अर्थ और टाइटेनियम खनन के साथ घरेलू सप्लाई चेन मजबूत करेगा

चीन पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम, 50,000 करोड़ रुपये निवेश और 40,000 रोजगार का लक्ष्य।

By श्वेता सिंह

Feb 28, 2026 14:39 IST

नई दिल्लीः भारत की खनिज आत्मनिर्भरता की दिशा में आंध्र प्रदेश बड़ा दांव खेलने जा रहा है। राज्य सरकार समुद्री तट रेखा को रेयर अर्थ और टाइटेनियम युक्त बीच सैंड माइनिंग के लिए खोलने की तैयारी में है। इस प्रयास को भारत की चीन पर आयात निर्भरता कम करने की कोशिश मानी जा रही है। महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू वैल्यू चेन विकसित करने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है।

समुद्री रेत में छिपा खजाना

आंध्र प्रदेश के पास देश के 'बीच सैंड मिनरल' (BSM) संसाधनों का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है। इस वजह से आंध्र का भारत में दूसरा स्थान है। श्रीकाकुलम, विजयनगरम, विशाखापत्तनम, काकीनाडा और कृष्णा जैसे तटीय जिलों में इल्मेनाइट, रुटाइल, जिरकॉन और मोनाजाइट के बड़े भंडार मौजूद हैं।

मोनाजाइट से रेयर अर्थ एलिमेंट्स प्राप्त होते हैं, जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों के मैग्नेट, विंड टरबाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा प्रणालियों में होता है। वहीं इल्मेनाइट और रुटाइल से टाइटेनियम डाइऑक्साइड पिगमेंट और टाइटेनियम मेटल तैयार किए जाते हैं। इनका इस्तेमाल पेंट, एयरोस्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।

राज्य की खनन एजेंसी एपीएमडीसी ने 10 प्रमुख बीच सैंड डिपॉजिट्स को मंजूरी दी है, जो हजारों हेक्टेयर में फैले हैं और लाखों टन खनिज भंडार रखते हैं।

चीन का दबदबा और भारत की चुनौती

वैश्विक स्तर पर टाइटेनियम मिनरल उत्पादन और रेयर अर्थ प्रोसेसिंग में चीन का वर्चस्व है। भारत अपनी टाइटेनियम डाइऑक्साइड पिगमेंट जरूरतों का 75 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा चीन से आता है।

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट की घरेलू मांग हर साल 15 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रही है। ऐसा माना जा रहा है कि 2030 तक यह मांग दोगुनी हो जायेगी। मौजूदा स्थिति में 80-90 प्रतिशत वैश्विक सप्लाई चेन पर चीन का नियंत्रण भारत के लिए आपूर्ति जोखिम पैदा करता है।

एकीकृत वैल्यू चेन बनाने की रणनीति

आंध्र प्रदेश खनन से लेकर सेपरेशन, रिफाइनिंग और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। राज्य में 6 ऑपरेशनल पोर्ट हैं, जिनकी कुल कार्गो हैंडलिंग क्षमता 330 मिलियन टन से अधिक है। मजबूत लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रोसेसिंग यूनिट्स को कच्चे माल के पास स्थापित करने में मदद करेंगे।

हाल की एक वर्कशॉप में राज्य के खनन मंत्री कोल्लू रविंद्र ने कहा कि सरकार ने अगले 10 वर्षों में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही 40,000 से ज्यादा रोजगार सृजित करने का लक्ष्य है।

क्रिटिकल मिनरल में भारत की मजबूती का प्रयास

यह पहल भारत की क्रिटिकल मिनरल सुरक्षा, क्लीन एनर्जी मिशन और रक्षा जरूरतों से सीधे जुड़ी है। यदि योजना बड़े पैमाने पर लागू होती है, तो आंध्र प्रदेश टाइटेनियम डाइऑक्साइड, टाइटेनियम मेटल, रेयर अर्थ ऑक्साइड्स और परमानेंट मैग्नेट के उत्पादन का प्रमुख घरेलू हब बन सकता है।

इससे भारत वैश्विक सप्लाई चेन में एक वैकल्पिक सप्लायर के रूप में उभर सकता है और ‘मेक इन इंडिया’ व आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती मिल सकती है।

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