नई दिल्ली : जिस तरह पिछले एक वर्ष में सोने की कीमत बढ़ी है, उससे यह याद रखना लगभग किसी के लिए भी संभव नहीं कि पिछले साल आज के दिन सोने की कीमत कितनी थी। इंटरनेट बताता है कि 28 फरवरी, 2025 को प्रति 10 ग्राम हॉलमार्क गहनों के सोने की कीमत 81,850 रुपये थी। जो 365 दिन बाद बढ़कर 1,61,250 रुपये हो गई। यानी साधारण गणित कहता है कि एक साल में सोने की कीमत 79,400 रुपये या 97 प्रतिशत बढ़ी है।
अब कीमत का हिसाब छोड़कर एक और बात पर ध्यान दीजिए। पिछले साल जून महीने में रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया था कि 2.5 लाख रुपये तक के गोल्ड लोन पर पहले का 75% लोन-टू-वैल्यू रेशियो (एलटीवी) बढ़ाकर 85% किया जा रहा है। नतीजतन, सोने के गहनों की मौजूदा कीमत के आधार पर गिरवी रखकर मिलने वाले लोन की राशि काफी बढ़ गई है। साथ ही रिजर्व बैंक के हालिया निर्देशों के अनुसार 2.5 से 5.0 लाख रुपये से कम के गोल्ड लोन पर एलटीवी अब 80% तक है। और 5 लाख रुपये से अधिक के लोन पर गहनों की कीमत का 75% तक।
इससे फायदा दोनों तरफ है एक ओर पर्सनल लोन की तुलना में कम ब्याज दर पर और आसानी से गोल्ड लोन मिल रहा है, दूसरी ओर आपका प्रिय गहना भी आपके पास ही रहता है। इसी सुरक्षा के कारण लोग अब लॉकर में बंद गहनों की बजाय उन्हें पूंजी के रूप में इस्तेमाल करने में अधिक सहज महसूस कर रहे हैं।
वैश्विक बाजार में सोने की आसमान छूती कीमत अब भारत के बैंकों के लिए भी वरदान बन गई है। ‘क्रिफ हाई मार्क’ और रिजर्व बैंक के हालिया आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर से दिसंबर तिमाही में रिटेल लोन बाजार में गोल्ड लोन अश्वमेध के घोड़े की तरह दौड़ा है। पिछले एक वर्ष में सोने के इस ऋण की मांग 90.3 प्रतिशत बढ़ी है, जो कुल क्रेडिट ग्रोथ से कहीं अधिक है।
‘गोल्डन’ बैलेंस शीट
इस ‘स्वर्ण-ऋण की लहर’ की वजह से सीएसबी बैंक, करूर वैश्य बैंक और सिटी यूनियन बैंक जैसे संस्थानों की बैलेंस शीट मजबूत हो रही है, साथ ही मुनाफे का मार्जिन और एसेट क्वालिटी भी सुधर रही है। आंकड़ों के अनुसार सीएसबी बैंक के कुल ऋण का लगभग 51 प्रतिशत अब गोल्ड लोन है। कनारा बैंक या इंडियन बैंक जैसे सरकारी बैंक भी पीछे नहीं हैं। फरवरी 2016 में जो सोना प्रति औंस 1,236 डॉलर था, वह 16 फरवरी 2026 को लगभग चार गुना बढ़कर 4,931.8 डॉलर हो गया है। पिछले मात्र 24 महीनों में फरवरी 2024 के 2,034 डॉलर से सोने की कीमत दोगुने से भी अधिक हो गई है। वर्तमान में गोल्ड लोन सालाना लगभग 128 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। पर्सनल लोन की तुलना में गोल्ड लोन कहीं अधिक सुरक्षित माना जाता है और भुगतान के मामले में ग्राहकों में अधिक अनुशासन देखा जाता है।
झुकाव और बाजार का विस्तार
भारतीय अब केवल छोटे ऋण ही नहीं, बल्कि ‘बिग टिकट लोन’ की ओर भी अधिक झुक रहे हैं। गोल्ड लोन के मामले में 5 लाख रुपये से अधिक के लोन की हिस्सेदारी अब 36.5 प्रतिशत है। इसी तरह लक्जरी हाउसिंग के लिए 75 लाख रुपये से अधिक के ऋण की मांग भी चरम पर है। डिजिटल ढांचे के विकास के कारण यह ऋण उछाल अब महानगरों से आगे बढ़कर कस्बों और ग्रामीण भारत तक पहुंच गया है।
सुरक्षा और चेतावनी
विशेषज्ञ चेतावनी भी दे रहे हैं। यदि सोने की कीमत अचानक काफी गिर जाती है, तो छोटे बैंकों पर दबाव बन सकता है। इसलिए सफलता के माहौल में भी ‘कंसंट्रेशन रिस्क’ से बचने के लिए ऋण के विविधीकरण पर जोर देने की सलाह बाजार विश्लेषक दे रहे हैं।