गुवाहाटीः पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारतीय चाय उद्योग पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारतीय चाय संघ (Tea Association of India) (असम शाखा) के अध्यक्ष दिपांजोल डेका ने कहा है कि मौजूदा युद्ध की स्थिति असम ही नहीं, बल्कि पूरे देश के चाय उद्योग को प्रभावित कर सकती है।
डेका ने स्पष्ट किया कि असम की चाय का बड़ा हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात के जरिए पुनः निर्यात होता है। खासकर दुबई मध्य-पूर्व के लिए एक प्रमुख री-एक्सपोर्ट केंद्र के रूप में काम करता है। ऐसे में क्षेत्रीय अस्थिरता सीधे तौर पर आपूर्ति श्रृंखला और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि यह संकट ऐसे समय में सामने आया है जब असम से चाय निर्यात में सुधार देखा जा रहा था। यदि ईरान में मौजूदा शासन व्यवस्था में बदलाव होता है, तो नए हालात के स्थिर होने में समय लगेगा। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ सकता है। डेका के मुताबिक, यह असम के चाय बाजार के लिए अच्छी खबर नहीं है और उद्योग को सतर्क रहना होगा।
इस बीच पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के सैन्य हमलों के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। संघर्ष चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। पश्चिम एशिया का यह संघर्ष न केवल भू-राजनीतिक समीकरण बदल रहा है, बल्कि वैश्विक व्यापार और निर्यात आधारित उद्योगों के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। असम की चाय, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी गुणवत्ता के लिए जानी जाती है, अब इस अस्थिरता के कारण अनिश्चित दौर में प्रवेश करती दिख रही है।