कोलकाताः पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव पर पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता दिलीप घोष (Dilip Ghosh) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई से संघर्ष बढ़ रहा है, उसका असर लंबे समय तक वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।
दिलीप घोष ने कहा कि दुनिया अभी महामारी के प्रभाव से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि युद्ध की स्थितियां बनने लगीं। उनके मुताबिक, यदि यह संघर्ष फैलता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि तेल की कीमतें बढ़ेंगी और गैस आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युद्ध को रोका जाना चाहिए।
भाजपा नेता ने भारत की विदेश नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने तटस्थ रुख अपनाया है और वह किसी पक्ष में नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि भारत शांति का पक्षधर है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, खासकर मध्य पूर्व में बड़ी संख्या में भारतीय रोजगार और व्यवसाय से जुड़े हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने सरकार की ओर से भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने की तैयारियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताने की अपील की।
इस बीच मध्य पूर्व में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के सैन्य हमलों के बाद संघर्ष चौथे दिन में पहुंच चुका है। जवाबी कार्रवाई में तेहरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइली परिसंपत्तियों को निशाना बनाया है।
तनाव के बीच दुबई स्थित अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास के पास संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद लगी आग को स्थानीय प्रशासन ने पूरी तरह बुझा दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ और आपातकालीन टीमों ने तुरंत स्थिति पर काबू पा लिया।
पश्चिम एशिया में बढ़ता यह टकराव न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती है, बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी दबाव बढ़ा सकता है। ऐसे समय में भारत ने शांति और संतुलन की नीति पर जोर देते हुए अपने नागरिकों और आर्थिक हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।