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ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता के बेटे मोजतबा खामेनेई ले सकते हैं पिता की जगह

अमेरिका ने 2019 में उन पर प्रतिबंध लगाया था। आरोप था कि वह अपने पिता की नीतियों को आगे बढ़ाने और क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को बढ़ाने में भूमिका निभा रहे थे।

By डॉ.अभिज्ञात

Mar 04, 2026 17:32 IST

दुबईः ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की इज़राइल के हवाई हमले में मौत के बाद अब देश में उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। संभावित नामों में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम शीर्ष पर है। मोजतबा का नाम सामने आने से ईरान की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।

मोजतबा पहले से ही ईरान की सत्ता के अंदर एक प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते रहे हैं। हालांकि उन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा और न ही किसी सरकारी पद पर नियुक्त हुए हैं। फिर भी कई लोग उन्हें लंबे समय से भविष्य के नेता के रूप में देखते रहे हैं।

अभी कहां हैं मोजतबा

हमले में उनके पिता और उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। इसके बाद से मोजतबा सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका और इज़राइल के लगातार हवाई हमलों के कारण वह फिलहाल सुरक्षित जगह पर छिपे हुए हैं।

क्यों बढ़ी उनकी दावेदारी

ईरान में नए सर्वोच्च नेता का चुनाव असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नाम की संस्था करती है, जिसमें 88 धार्मिक नेता शामिल होते हैं। अब क्योंकि उनके पिता और पत्नी को ईरान में युद्ध के “शहीद” के रूप में देखा जा रहा है, इसलिए कुछ लोगों का मानना है कि इससे मोजतबा की दावेदारी मजबूत हो सकती है।

मोजतबा खामेनेई कौन हैं

मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में हुआ था। वह ईरान-इराक युद्ध में भी शामिल रहे थे और ईरान की शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड के साथ उनके करीबी संबंध माने जाते हैं। वह अपने पिता के दफ्तर में लंबे समय तक काम करते रहे और पर्दे के पीछे कई फैसलों में प्रभाव रखते थे। इसी वजह से उन्हें अक्सर पर्दे के पीछे की ताकत भी कहा जाता है।

अमेरिका ने लगाया था प्रतिबंध

अमेरिका ने 2019 में उन पर प्रतिबंध लगाया था। आरोप था कि वह अपने पिता की नीतियों को आगे बढ़ाने और क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को बढ़ाने में भूमिका निभा रहे थे।

क्यों अहम है यह पद

ईरान में सर्वोच्च नेता देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है। वही सेना का प्रमुख होता है और सरकार की बड़ी नीतियों पर अंतिम फैसला उसी का होता है। इस समय ईरान इज़राइल और अमेरिका के साथ गंभीर तनाव में है। ऐसे में जो भी नया सर्वोच्च नेता बनेगा, उसे युद्ध, सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े मुद्दों पर फैसले लेने होंगे।

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