एक साल के अंदर दूसरी बार चीन ने अपने एक और 'मित्र' देश को मुश्किल में डाल दिया है - पहले पाकिस्तान और अब ईरान। आरोप है कि बीजिंग द्वारा इन दोनों देशों को दिया गया अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9B जरूरत के समय काम ही नहीं आया।
अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने कार्रवाई की। 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत नई दिल्ली ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया। पाकिस्तानी सेना ने इसका पलटवार करने की कोशिश की लेकिन उन्हें भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। भारतीय सेना ने कराची और लाहौर जैसे इलाकों में हवाई हमले किए।
उसी समय इस्लामाबाद ने आरोप लगाया था कि इस जवाबी हमले के समय चीन द्वारा दिए गए अत्याधुनिक HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम ने काम नहीं किया। यह डिफेंस सिस्टम भारत के ड्रोन को रोकने में नाकाम रहा। यहां तक कि भारतीय ड्रोन के हमलों से HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा। इसके बाद पूरी दुनिया के सामने चीन को शर्मिंदा होना पड़ा था।
पूरी दुनिया के सामने चीन की तकनीक की विश्वसनीयता पर सवाल उठ गया। अब वही घटना फिर दोहराई गई है, बस जगह अलग है। चीन ने ईरान के साथ तेल के बदले हथियार (Oil-for-Weapons) के समझौते के तहत HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम की डील की। पिछले साल जुलाई में तेहरान ने यह एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा ताकि इजराइल के साथ संभावित युद्ध में अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत कर सके। तेहरान इस मामले में कमजोर था इसलिए उसने चीन पर भरोसा करके HQ-9B सिस्टम खरीदा।
लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ और यह फिर से साबित हो गया कि सिस्टम उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर सका। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले को यह एयर डिफेंस सिस्टम रोक नहीं पाया। रिपोर्ट के अनुसार इसकी वजह से ईरान को भारी नुकसान हुआ।
पाकिस्तान में पहले ही यह हथियार असफल हो चुका था। इसके बावजूद ईरान ने उस पर भरोसा किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक बड़ी गलती थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ईरान ने चीन का HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम राजधानी तेहरान के महत्वपूर्ण इलाकों और परमाणु केंद्र नातांज और फोर्डो में तैनात किया था। लेकिन अफसोस की बात है कि इजराइल के एक भी मिसाइल को रोकने में यह सिस्टम सफल नहीं हुआ।
चीन पर भरोसा दिखाने के कारण ईरान को फिर भारी नुकसान झेलना पड़ा। पिछले साल जून में इजराइल के ऑपरेशन राइजिंग लायन के दौरान तेहरान को झटका लगा। पश्चिम एशिया के इस देश के महत्वपूर्ण इलाकों में इजराइली सेना के हमलों से भारी नुकसान हुआ और कई लोगों की मौत हुई।
पिछले साल अमेरिका ने भी तेहरान के परमाणु केंद्र पर हमला कर नुकसान पहुंचाया था। इसी वजह से ईरान ने अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए चीन पर भरोसा किया और HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा। लेकिन अब यह स्पष्ट हो रहा है कि बीजिंग उनके भरोसे पर खरा नहीं उतरा। हालांकि इस मामले में चीन ने कोई टिप्पणी नहीं की है।
क्या HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम और यह कैसे काम करता है?
यह एयर डिफेंस सिस्टम चीन की एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन (Aerospace Science and Industry Corporation) द्वारा बनाया गया है। HQ-9B को रूस के S-300PMU और अमेरिका के पैट्रियट PAC-2 से प्रेरित होकर विकसित किया गया। दावा किया जाता है कि यह सिस्टम 50 किलोमीटर ऊंचाई से लक्ष्य को मारने में सक्षम है।
सक्रिय रडार की मदद से यह लगभग 100 हमलों को एक साथ ट्रैक कर सकता है और 6 से 8 हमलों को रोकने में सक्षम होने का दावा बीजिंग करता है। लेकिन आरोप लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान और ईरान में इसे इस्तेमाल करने पर यह सिस्टम कोई कामयाबी हासिल नहीं कर सका। हालांकि चीन ने इस एयर डिफेंस सिस्टम को अपने तिब्बत, दक्षिण चीन सागर और बीजिंग में तैनात किया है।