पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की आग में कई देश जल रहे हैं। इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया जिसमें सर्वोच्य नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गयी। इसके बाद तेहरान बदले की आग में जल उठा जो दावानल की तरह पश्चिम एशिया के बाकी देशों में फैल गयी।
अमेरिका के सीधे वार के बदले में ईरान ने कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत समेत पश्चिम एशिया (Middle East) के देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस प्रक्रिया में ईरान का हमला दुबई और अबुधाबी भी सह रहा है।
अमेरिकी सैन्य ठिकाना नहीं होने के बावजूद क्यों ईरान का निशाना क्यों दुबई और अबुधाबी बन रहे हैं? 28 फरवरी की रात से क्यों इन दोनों शहरों में एक के बाद एक मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं?
दुबई क्यों बन रहा है निशाना?
संयुक्त अरब अमीरात का सबसे बड़ा शहर है दुबई। यहां एक से बढ़कर एक गगनचुंबी इमारत, करमुक्त विलासिता से भरा जीवन, धनकुबेरों के ठिकाने से लेकर बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से सजाया हुआ एक रेतीला शहर। यहीं दुबई की पहचान है जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। लेकिन 28 फरवरी से दुनिया का सबसे सुरक्षित शहर दुबई 'सेफ हेवन' होने की अपनी पहचान खो चुका है। शनिवार की रात से दुबई के कई लोकप्रिय और महत्वपूर्ण घनी आबादी वाली जगहों पर ईरानी ड्रोन का हमला हो चुका है।
रॉयटर्स की खबरों के मुताबिक 28 फरवरी की रात से दुबई और अबुधाबी की स्ट्रैटेजिक व हाई वैल्यू जोन में ड्रोन और बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया जा रहा है। जिन इलाकों में हमला किया जा रहा है उनमें जेबेल अली बंदरगाह, बुर्ज अल अरब होटल, दुबई अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, अल दफरा एयरबेस, पाम जुमेराह आदि रिसॉर्ट हैं। ये जगहें भले ही सैन्य केंद्र नहीं हैं लेकिन दुबई की जान हैं।
क्यों हो रहा है दुबई पर हमला?
विशेषज्ञों का मानना है कि दुबई में भले ही कोई स्पष्ट अमेरिकी सैन्य ठिकाना नहीं है लेकिन अमेरिकी अभियानों के समर्थन के मामले में दुबई की भूमिका को अस्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा इस्लामिक ब्रदरहुड को स्वीकार करते हुए सऊदी अरब, कतर, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात के प्रशासनों को ईरान का समर्थन करना चाहिए था लेकिन इनमें से किसी ने भी अमेरिकी हमले का विरोध नहीं किया। इसलिए ईरान के बदले की आग में अब खाड़ी के ये देश भी जल रहे हैं।
दुबई में भले ही घोषित अमेरिकी सैन्य ठिकाना नहीं है लेकिन अल दफरा एयर बेस अमेरिकी वायु सेना का प्रमुख ठिकाना है। अबुधाबी के पश्चिम में मौजूद इस एयरबेस के इस्तेमाल के लिए UAE ने वॉशिंग्टन को छूट दे रखी है। अमेरिका इस एयरबेस का इस्तेमाल इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अभियान चलाने में और इन इलाकों की निगरानी करने के लिए करता है। इसलिए ईरान के बदले की सूची में संयुक्त अरब अमीरात की जान दुबई भी शामिल है।
Jebel Ali Port का महत्व?
ईरान के मिसाइल ने इस Port पर भी हमला बोला है। ईरान के लिए यह पोर्ट अमेरिकी सैन्य नेटवर्क का बड़ा हिस्सा है। पश्चिम एशिया पर नौसेना के लिए इस्तेमाल होने वाला यह सबसे बड़ा पोर्ट है। अमेरिकी विमानवाही युद्धपोत और नौसेना के जहाज नियमित रूप से इस पोर्ट पर आते रहते हैं। इसलिए UAE के इस पोर्ट को ईरान ने निशाना बनाया है। पिछले कुछ दिनों में दुबई में ऐशोआराम से जीवन बिताने वाले लोगों के कानों में रॉक म्यूजिक के बजाए साइरन सुनाई दे रहे हैं।
हालांकि पिछले कुछ दिनों में UAE के एयर डिफेंस ने 165 बैलेस्टिक मिसाइल और 540 से अधिक ड्रोन का मुकाबला किया है। इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय लगातार आम जनता को आश्वस्त करने का काम भी कर रही है।