वॉशिंगटन: अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन की उस कोशिश को खारिज कर दिया, जिसमें उसने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले महीने अवैध घोषित किए गए टैरिफ के रिफंड प्रक्रिया को धीमा करने का प्रयास किया था। यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने रिफंड प्रक्रिया का अगला चरण शुरू करते हुए इसे निचली अदालत के पास भेज दिया, ताकि रिफंड से जुड़े जटिल मामलों को व्यवस्थित किया जा सके।
पिछले शुक्रवार को न्याय विभाग ने अदालत से 90 दिनों तक प्रक्रिया स्थगित करने का अनुरोध किया था, लेकिन न्यायाधीशों ने इसे स्वीकार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को निर्णय दिया था कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ अधिकांश देशों के लिए गैरकानूनी थे। इस निर्णय के बाद आयातकों के पास उन टैरिफ का रिफंड मांगने का रास्ता साफ हो गया।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने दिसंबर 2025 तक इन टैरिफ से 1.30 खरब डॉलर एकत्र किए थे। पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अनुसार कुल रिफंड राशि लगभग 1.75 खरब डॉलर तक हो सकती है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए। अब न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड यह तय करेगा कि रिफंड प्रक्रिया कैसे आगे बढ़े।
ट्रेड लॉयर रयान माजेरस ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड जल्दी आदेश जारी करेगा और सरकार से रिफंड पर उनके प्लान का अपडेट मांगेगा। अदालत सरकार से यह भी पूछ सकती है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पूरा करने के लिए उनकी योजना क्या है।"
ट्रंप प्रशासन अब उन टैरिफ़ की जगह नए टैरिफ लगाने की योजना पर विचार कर रहा है। एक सवाल यह भी है कि सरकार इन रिफंड्स के भुगतान के लिए फंड कैसे जुटाएगी। राव ने कहा, "यह ऐसा नहीं है कि कोई सौ अरब डॉलर कहीं रखे हैं और चेक काट दिए जाएं। यह ट्रेजरी की समस्या है। हो सकता है कि प्रशासन रिफंड देने के लिए नए टैरिफ लगाए, जो रणनीतिक व्यापार समझौतों और सौदेबाजी में भी मदद करेंगे।"