पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी परिस्थिति अब नया मोड़ ले रही है। अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान का बदला अब उसपर ही भारी पड़ने वाला है। सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कुछ ऐसा ही संकेत दिया है। उनका दावा है कि ईरान के लगातार हमले की वजह से अब खाड़ी के कई देश अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान पर असली 'सुनामी' का अभी भी आना बाकी है।
'चौंकाने वाला खुलासा', क्यों ट्रंप ने कहा ऐसा?
अमेरिकी मीडिया CNN को दिए एक इंटरव्यू में प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना को इस युद्ध का सबसे बड़ा 'चौंकाने वाला खुलासा' करार दिया। उन्होंने कहा, 'हम तो चौंक उठे हैं। हमने उनसे कहा था कि हम संभाल लेंगे। लेकिन अब वे भी युद्ध करना चाहते हैं और बहुत ही आक्रमणात्मक रूप से लड़ना चाहते हैं।' ट्रंप ने आगे कहा कि शुरुआत में ये देश युद्ध में शामिल ही नहीं होना चाहते थे। वे दूर से पूरी परिस्थिति पर नजर रख रहे थे लेकिन अब वे सीधे युद्ध में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं।
अचानक क्यों युद्ध में शामिल होना चाहते हैं खाड़ी के देश?
अमेरिका और इजरायल को निशाना बनाकर ईरान के मिसाइलों का वार अरब देशों ने भी सहा है। ट्रंप का दावा है कि बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों पर तेहरान ने हमला किया है।
ट्रंप का दावा है कि इन देशों के नागरिक इलाके और आम नागरिक भी ईरान के हमले से बच नहीं पाए हैं। ईरान ने होटल पर हमला किया है। आवासीय भवनों पर हमला किया है। इस वजह से ही इन देशों में गुस्सा पनप रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि पश्चिम एशिया के खाड़ी के देशों के नेतृत्वों में उनके व्यक्तिगत स्तर पर भी अच्छी समझदारी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अरब के नेताओं को 'सख्त और बुद्धिमान' करार दिया है। उनका मानना है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त कदम में अरब के देशों के शामिल होने से यह सैन्य गठबंधन और भी मजबूत हो जाएगा।
असली 'सुनामी' का आना बाकी है!
आने वाले कुछ दिनों में अमेरिकी सैन्य कार्रवाईयां और भी तेज होने वाली हैं, इस बात का स्पष्ट संकेत डोनाल्ड ट्रंप ने दिया है। उनका दावा है कि अमेरिका की सेना ईरान को 'पीटकर सीधा कर देगी'। ट्रंप ने कहा कि हमारे हाथों में विश्व की बेहतरीन सैन्य बल हैं और हम उसका सदुपयोग कर रहे हैं।
सिर्फ इतना ही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने धमकी देते हुए कहा कि हमने अभी तक उनपर घातक प्रहार करना शुरु भी नहीं किया है। असली 'सुनामी' तो अभी तक आयी ही नहीं है। सबसे घातक प्रहार बहुत जल्द होने वाला है। लेकिन क्या होगा यह घातक प्रहार? इस बारे में भी उन्होंने स्पष्ट जानकारी दी।
क्षेत्रीय अशांति की जड़ है...
तेहरान के परमाणु हथियार बनाने की मंशा को ही क्षेत्रीय अशांति की जड़ बताते हुए प्रेसिडेंस ट्रंप ने कड़ा निशाना साधा। उनका कहना है कि ईरान सालों से इस ‘काले बादलों के साए’ में जी रहा है और इसी वजह से पश्चिम एशिया में कभी स्थायी शांति नहीं आ पाई।
सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ उन्होंने यह भी साफ किया कि वॉशिंगटन ऐसे कदम उठा रहा है ताकि ईरान की आम जनता को मौजूदा शासकों से ‘मुक्ति’ मिल सके। फिलहाल जब तक युद्ध चलेगा सुरक्षा के मद्देनजर उन्होंने ईरान के आम नागरिकों को घर के भीतर ही रहने की सलाह दी है।