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क्या ईरान की एलिट सेना पर नहीं है सरकार का कोई नियंत्रण? चर्चाओं में छाया विदेश मंत्री का बयान

इंटरव्यू के दौरान ईरान के विदेश मंत्री के एक बयान को लेकर काफी चर्चाएं हो रही है। उन्होंने ऐसा क्या कह दिया? ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अब ईरान की मिलिट्री यूनिट काफी हद तक स्वतंत्र होकर काम कर रही है।

By Abhirup Datta, Posted By : Moumita Bhattacharya

Mar 02, 2026 21:16 IST

ओमान के समुद्रतट पर ईरान ने हमला किया था। इस बाबत दिए एक इंटरव्यू में एक सवाल का जवाब देते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बड़ा दावा किया है। अल जजिरा को दिए एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने दावा किया कि ओमान में जो हुआ वह हमारा फैसला नहीं था। हमने हमारी सेना से कहा है कि लक्ष्य को निर्धारित करते समय और सावधानी बरतनी होगी। इसका मतलब है कि ईरान का ओमान पर हमले का कोई इरादा ही नहीं था?

इस इंटरव्यू के दौरान ईरान के विदेश मंत्री के एक बयान को लेकर काफी चर्चाएं हो रही है। उन्होंने ऐसा क्या कह दिया? ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अब ईरान की मिलिट्री यूनिट काफी हद तक स्वतंत्र होकर काम कर रही है। उनका दावा है कि पहले से ही जो आदेश दिए जा चुके हैं, उसके आधार पर ही वे काम कर रहे हैं।

इसके बाद से उनके बयान को लेकर चर्चाएं शुरू हो गयी है। क्या ईरान की एलिट वाहिनी IRGC (रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स) ईरानी सरकार के नियंत्रण में नहीं है? हालांकि जानकारों का मानना है कि यह बिल्कुल असंभव हो, ऐसा बिल्कुल नहीं है।

बीबीसी की मीडिया रिपोर्ट से लेकर और भी कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वर्ष 1979 में शाह के शासन की जगह रूहोल्लाह खामेनेई के नेतृत्व में इस्लामी शासन आया। उसके बाद ईरान के संविधान में बदलाव किया गया। ईरान में 2 अलग-अलग सेना वाहिनी ने काम करना शुरू किया। इनमें से एक आर्टेश (Artesh) और दूसरी IRGC (रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स) कहलायी।

आर्टेश की जिम्मेदारी मुख्य रूप से ईरान की सीमा की रक्षा और घुसपैठियों को रोकना है। वहीं IRGC इस्लामिक शासन को बरकरार रखने के साथ ही राजनीति और सेना के बीच तालमेल बिठाने का काम कर रही है। इसके साथ ही ईरान समर्थित हुथी हिजबुल्ला, इराक और सिरिया में विभिन्न विद्रोही संगठनों को वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण भी देती है। ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन के भंडार उनके पास ही मौजूद हैं। इस वाहिनी के पास खुद की स्थल सेना, वायु सेना और नौसेना मौजूद है। इस वाहिनी को भारी मात्रा में वित्तीय आवंटन भी मिलता है।

बताया जाता है कि अब तक IRGC पूरी तरह से खामेनेई के अधीन ही था। खानेमेई की मौत का बदला लेने का IRGC ने दावा भी किया है। ऐसी स्थिति में क्या IRGC का कोई नेता ही नहीं है? क्या IRGC ईरानी सरकार के नियंत्रण में नहीं है? अगर ऐसा ही हुआ तो फिर वे प्रत्याघात कैसे करेंगे, इस बारे में ईरान सरकार के पास कोई जानकारी ही नहीं है। कम से कम अब्बास अराघची के बयान तो ऐसा ही लग रहा है।

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