इस्लामाबाद/कराची/लाहौरः ईरान के शिया सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के विरोध में रविवार को पाकिस्तान के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए। कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर धावा बोलने की कोशिश के दौरान हुई गोलीबारी में 22 लोगों की मौत हो गई। अलग-अलग शहरों में हिंसक झड़पें और आगजनी भी हुई।
खामेनेई की शनिवार को तेहरान पर हुए अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी, जिसकी पुष्टि रविवार को हुई। इसके बाद पाकिस्तान के शिया समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया। पाकिस्तान की करीब 24 करोड़ आबादी में शिया समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है।
इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा कि वह कराची और लाहौर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों पर हो रहे प्रदर्शनों की निगरानी कर रहा है।पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने नागरिकों से कानून हाथ में न लेने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की।
कराची और लाहौर के अलावा इस्लामाबाद, पेशावर और क्वेटा सहित कई बड़े शहरों में भी प्रदर्शन हुए। ‘द न्यूज इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के अनुसार कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और कानून-व्यवस्था संभाल रहे सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुईं और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कई बार आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
कराची में हालात सबसे ज्यादा बिगड़े, जहां गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने माई कोलाची रोड पर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हमला करने की कोशिश की। सुरक्षाबलों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। दूतावास के पास हुए प्रदर्शनों के दौरान 22 लोगों की मौत हुई और सौ से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें से कई का इलाज ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है, जिनमें चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसएसपी असद रज़ा के मुताबिक जब भीड़ ने पुलिस पर हमला करना शुरू किया तो हालात काबू में करने के लिए आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया गया।
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ अख़बार के अनुसार सिंध सरकार के आधिकारिक बयान में कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने दूतावास की बाहरी सुरक्षा घेरा तोड़ दिया, परिसर में घुस गए और नुकसान पहुंचाया।
सिंध के सूचना मंत्री के प्रवक्ता हुसैन मंसूर ने झड़पों में हुई मौतों पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की सुरक्षा घेरा तोड़कर तोड़फोड़ की।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र के गिलगित और स्कर्दू शहरों में भी प्रदर्शन हुए, जहां शिया आबादी बड़ी संख्या में रहती है। प्रदर्शनकारियों ने गिलगित और स्कर्दू में संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह के दफ्तरों में आग लगा दी। एक स्कूल, पुलिस अधीक्षक का कार्यालय और आगा खान रूरल सपोर्ट प्रोग्राम का कार्यालय भी जला दिया गया।
अधिकारियों ने स्कर्दू ज़िले में कर्फ्यू लगा दिया। गिलगित-बाल्टिस्तान पुलिस ने बयान में कहा कि पाकिस्तान सेना को बुलाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर काराकोरम हाईवे भी जाम कर दिया।
लाहौर में सैकड़ों लोगों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को घेर लिया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने दूतावास में घुसने की कोशिश भी की। जो दो लोग अंदर घुसने में सफल हुए, उन्हें दूतावास की सुरक्षा ने पकड़ लिया और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया।
प्रदर्शनकारी “डेथ टू अमेरिका” के नारे लगा रहे थे। कई लोग खामेनेई की तस्वीरें हाथ में लेकर रोते हुए नजर आए।
एमडब्ल्यूएम के प्रमुख और सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने दावा किया कि पूरे पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था बलों के साथ झड़पों में 34 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि कराची में 18, इस्लामाबाद में चार और स्कर्दू व गिलगित में छह-छह लोगों की मौत हुई।
इस्लामाबाद में प्रशासन ने धारा 144 लागू कर सभी सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया और प्रदर्शनकारियों को अमेरिकी दूतावास की ओर बढ़ने से रोक दिया।
गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने कहा कि “आयातुल्लाह खामेनेई की शहादत” के बाद पाकिस्तान का हर नागरिक उसी तरह दुखी है जैसे ईरान के लोग शोक मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ईरान के लोगों के साथ है, लेकिन नागरिकों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की।
एमडब्ल्यूएम प्रमुख राजा नासिर अब्बास ने अपने एक्स पोस्ट में आरोप लगाया कि इस्लामाबाद, गिलगित और स्कर्दू में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की। उन्होंने कहा कि नागरिकों पर जीवित गोलियों का इस्तेमाल किसी भी सुरक्षा सिद्धांत के तहत जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।