पश्चिम एशिया में अशांति छायी हुई है। ईरान में इजराइली एयरस्ट्राइक के बाद इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मौजूदा ईरानी शासन के खिलाफ सीधे विद्रोह का आह्वान किया है। रविवार को जारी एक वीडियो मैसेज में उन्होंने ईरान के लोगों से एकजुट होने और मौजूदा 'आतंकवादी शासन' को उखाड़ फेंकने के लिए सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है।
‘एक पीढ़ी को यह मौका एक बार ही मिलता है’
इजराइली सेना के ऑपरेशन ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ में ईरान के सर्वोच्य नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान की सत्ताधारी पार्टी अभी तक उस झटके से उबर नहीं पायी है और अपनी नेतृत्व को पूरी तरह से संभाल नहीं पायी है। ऐसी परिस्थिति में नेतन्याहू ने ईरानी लोगों को संदेश भेजा है, ‘यह मौका एक पीढ़ी को एक बार ही मिलता है।’
नेतन्याहू ने ईरान के नागरिकों से शांत न रहने की अपील करते हुए कहा है कि आइए, लाखों की संख्या में सड़कों पर उतरें और मौजूदा सरकार को खत्म करने के लिए एकजुट हों।
जातिवादी एकता की अपील
नेतन्याहू ने खास तौर पर ईरान के अलग-अलग समूहों जिनमें फारसी, कुर्द, अजेरी, अहवाजी और बलूच शामिल हैं, से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि ईरान के तानाशाही शासन के विरोधी जिस बाहरी मदद का इंतजार कर रहे थे वह आखिरकार आ ही गई है। उन्होंने ईरानियों को भरोसा दिलाया है कि 'उनका समय जल्द ही आने वाला है।'
क्या मकसद रिजीम चेंज है?
परमाणु निरस्त्रीकरण तो एक बहाना है। क्या ईरान में शासन का परिवर्तन ही इस इजरायली-अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य है? नेतन्याहू का दावा है कि मुख्य मकसद भले ही ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता को खत्म करना है। हालांकि यह सैन्य दबाव पक्का राजनैतिक तख्तापलट की वजह बन सकता है। उनके मुताबिक ईरानियों को इस बार अपनी किस्मत अपने हाथों में लेने का मौका मिला है।