जिस बात का डर था, शनिवार को वह सच साबित हो गया। पश्चिम एशिया में युद्ध की शुरुआत हो गई है। हालांकि तेहरान ने अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले के जवाब में होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक ईरान ने अभी के लिए रास्ते को घुमाकर ब्लॉक करने का पक्का इंतजाम कर लिया है।
हालांकि सिर्फ सरकारी कदम पर भरोसा करने के बजाय दुनिया की कई बड़ी तेल बनाने वाली कंपनियों और ट्रेडिंग हाउस ने भी घोषणा कर दी है कि वे होर्मुज स्ट्रेट से कार्गो ट्रांसपोर्टेशन को अनिश्चित समय के लिए रोक रहे हैं।
इनके अलावा दुनिया भर में मशहूर टैंकर एसोसिएशन इंटरटैंको ने भी कहा है कि उन्हें अमेरिकी नेवी ने पहले ही चेतावनी दे दी है। कहा गया है कि अगर युद्ध की स्थिति में तेल टैंकर और कार्गो जहाज होर्मुज स्ट्रेट और आस-पास के इलाकों से गुजरते हैं तो मरीन गार्ड्स उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं कर पाएंगे।
इसके बाद उस रास्ते से सभी कमर्शियल आवाजाही को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है। मार्केट विशेषज्ञ संस्था केपलर के मुताबिक इसका नतीजा यह हुआ कि कम से कम 11 तेल और LNG टैंकर अपनी गति को धीमी कर धीरे-धीरे अपने रास्ते बदल रहे हैं।
ग्लोबल ट्रेड पर इसका कितना बुरा असर पड़ेगा इस बात का अभी अंदाजा लगाना भी संभव नहीं है। विशेषज्ञ आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि इस युद्ध के असर से आने वाले दिनों में विश्व बाजार में अपरिष्कृत तेल की कीमतें मौजूदा स्तर से 57% तक बढ़कर $110 प्रति बैरल हो सकती हैं।
केंद्र सरकार की चिंता यह है कि भारत का सालाना 50% कच्चा तेल और 60% से ज्यादा प्राकृतिक गैस होर्मुज स्ट्रेट से आता है। इसलिए अगर स्ट्रेट बंद हो जाता है तो भारत उन देशों की सूची में सबसे ऊपर होगा जिन्हें सबसे ज्यादा नुकसान होगा। फरवरी 2025 में भारत इस रास्ते से हर दिन 2 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात करवाता था लेकिन इस साल इस रास्ते से आयात होने वाले तेल की मात्रा जो मुख्य रूप से इराक-सऊदी अरब-संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत से होता है, बढ़कर 2.6 मिलियन बैरल हो गई है।
इस मामले से वाकिफ केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने, अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर दावा किया कि युद्ध के बीच नई दिल्ली को सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (लाल सागर की तरफ) और संयुक्त अरब अमीरात की अबू धाबी अपरिष्कृत तेल पाइपलाइन (फुजैराह के रास्ते) के जरिए तेल आयात करने पर सोचना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि हालांकि इस अतिरिक्त रास्ते की वजह से परिवहन का खर्च काफी बढ़ गया है लेकिन नई दिल्ली के पास कोई और सही विकल्प इस समय मौजूद नहीं है।
केप्लर एक्सपर्ट्स का दावा है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद हो जाता है तो भारत के पास रूस के अलावा अमेरिका-पश्चि अफ्रीका (नाइजीरिया, अंगोला) और लैटिन अमेरिका (ब्राजील-कोलंबिया-वेनेजुएला) से तेल आयात करने का विकल्प होगा। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं होगी अगर तेल परिवहन का खर्च इतना बढ़ जाए कि घरेलू मार्केट में तेल की कीमतें आसमान छूने लग जाएंगी।