यरूशलेम/तेहरान: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार को राष्ट्र के नाम टीवी संबोधन में दावा किया कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की “बढ़ती हुई संभावनाएं” हैं। नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका-इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में खामेनेई के तेहरान स्थित कंपाउंड को निशाना बनाया गया है।
उन्होंने कहा, “ऐसे कई संकेत मिल रहे हैं कि खामेनेई अब जीवित नहीं हैं।” हमले की शुरुआत के बाद से खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।
‘ऑपरेशन लायंस रोअर’: 500 से ज्यादा ठिकानों पर हमला
अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई को ‘ऑपरेशन लायंस रोअर’ नाम दिया गया है। इजरायली सेना के मुताबिक, इस ऑपरेशन के तहत ईरान में 500 से अधिक लक्ष्यों को नष्ट किया गया है।
इजरायल का दावा है कि तेहरान में खामेनेई के कंपाउंड को पूरी तरह तबाह कर दिया गया, जहां रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
ईरानी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में 201 लोगों की मौत हुई है और 747 घायल हुए हैं। हमले केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहे, बल्कि इस्फहान सहित कई प्रमुख शहरों को निशाना बनाया गया।
इजरायल का कहना है कि ये हमले ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के लिए किए गए, जिन्हें वह अपनी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है।
ईरान का पलटवार: ‘खामेनेई जिंदा हैं’
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एनबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि खामेनेई “जहां तक मुझे जानकारी है, जिंदा हैं।”
हालांकि, खामेनेई की ओर से कोई वीडियो संदेश या सार्वजनिक संबोधन सामने नहीं आया है, और उनका निर्धारित भाषण भी रद्द कर दिया गया।
इजरायली मीडिया चैनल 12 और कान न्यूज ने दावा किया है कि खामेनेई से संपर्क टूट गया है और उनकी मौत की संभावना मजबूत है। लेकिन अभी तक किसी भी पक्ष से आधिकारिक और ठोस पुष्टि नहीं हुई है।
तीन दशक से सत्ता में खामेनेई
1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता रहे खामेनेई देश की राजनीति, सेना और विदेश नीति पर व्यापक नियंत्रण रखते हैं। वे इजरायल और अमेरिका के मुखर आलोचक रहे हैं और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के समर्थक माने जाते हैं।
हाल के वर्षों में ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर रहा है। जून 2025 में दोनों देशों के बीच 12 दिन का युद्ध भी हुआ था। अपने संबोधन में नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि खामेनेई ने “30 वर्षों तक आतंकवाद को बढ़ावा दिया” और ईरानी जनता से सड़कों पर उतरकर शासन को खत्म करने की अपील की।
ट्रंप की प्रतिक्रिया और वैश्विक नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमलों का उद्देश्य ईरानी लोगों को “स्वतंत्रता” दिलाना है। दुनिया भर में यह घटनाक्रम सुर्खियों में है। हालांकि, खामेनेई की स्थिति को लेकर स्वतंत्र पुष्टि का अभाव बना हुआ है। क्षेत्रीय और वैश्विक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह घटनाक्रम मध्य पूर्व की स्थिरता पर गहरा असर डाल सकता है।
स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।