नयी दिल्लीः पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है। अमेरिका के समर्थन से इज़राइल ईरान पर लगातार हमले कर रहा है। जवाब में ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिका के नौसैनिक अड्डे पर हमला किया है।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और कूटनीतिक रास्ते से समस्या सुलझाने का संदेश दिया।
राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जयशंकर ने रात में अराघची को फोन किया और दोनों नेताओं के बीच कुछ समय तक चर्चा हुई। बातचीत के दौरान जयशंकर ने आम नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया और सभी पक्षों से तनाव कम करने के लिए बातचीत की मेज पर आने की अपील की। बाद में विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल की घटनाओं को लेकर नई दिल्ली गंभीर रूप से चिंतित है। ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों से दूतावास लगातार संपर्क बनाए हुए है।
शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे पहला मिसाइल तेहरान के जोमहुरी स्क्वायर स्थित एक रिहायशी इमारत पर गिरा। इसके थोड़ी देर बाद हसन आबाद स्क्वायर के पास भी तेज धमाके सुने गए और एक सरकारी भवन हिल गया। शहर के केंद्र में पास्तूर स्ट्रीट के आसपास भी इज़राइल ने हमला किया।
इसके जवाब में ईरान ने भी कार्रवाई की। तेहरान के तीन इलाकों पर हमले के बाद ईरान ने बहरीन में अमेरिका के नौसैनिक अड्डे, जहां अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय है, पर मिसाइल दागे। बहरीन सरकार के अनुसार, पहले इज़राइल की ओर 30 से 35 मिसाइलें दागी गईं और उसके बाद कुछ मिसाइलें अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के ठिकाने पर गिरीं।
बहरीन के अलावा कतर, कुवैत और जॉर्डन में भी अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन ठिकानों पर भी हमले की आशंका बनी हुई है। खासतौर पर कतर के अल उदैद एयर बेस, कुवैत के अल सलेम एयर बेस और जॉर्डन के मुवाफ्फक अल-सालती एयर बेस को संभावित निशाने के रूप में देखा जा रहा है।
इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जनता से सरकार बदलने की अपील की है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि वर्षों से आप अमेरिका से मदद की अपील कर रहे हैं, अब आपके पास मौका है कि आप सरकार अपने हाथ में लें।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इसी तरह का संदेश देते हुए कहा कि ईरान की जनता यदि सत्ता परिवर्तन चाहती है तो इज़राइल ऐसा माहौल बनाने में मदद करेगा।