नयी दिल्लीः आग सुलग ही रही थी, अब विस्फोट भी हो गया। बातचीत के प्रस्ताव और शांति स्थापना के सभी प्रयासों को दरकिनार कर उपमहाद्वीप की कूटनीतिक स्थिरता को समाप्त करते हुए पाकिस्तान और अफगानिस्तान सीधे युद्ध में उतर गए। पहल भारत के पश्चिमी पड़ोसी पाकिस्तान ने ही की। इतना ही नहीं, युद्ध के कारणों से नई दिल्ली का नाम भी जोड़ दिया गया और परोक्ष रूप से भारत को भी जिम्मेदार ठहराया गया।
भारतीय समयानुसार गुरुवार देर रात पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ खुले तौर पर युद्ध की घोषणा की। इस अभियान का नाम रखा गया ‘ग़ज़ब लिल हक़’ (न्याय के लिए क्रोध)। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा, “बहुत हो चुका। अब और सहन नहीं करेंगे। हमारी भी धैर्य की सीमा है। अब तुम्हारे और हमारे बीच सीधा युद्ध होगा।”
युद्ध का कारण बताते हुए आसिफ ने कहा, “हम शांति के पक्षधर हैं। लेकिन यदि हम पर हमला होगा तो चुप नहीं बैठेंगे।” बाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “फितना-अल-ख़वारिज़ (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान या टीटीपी को पाकिस्तान इसी नाम से पुकारता है) और फितना-अल-हिंदुस्तान (बीएलए और बीएलओ जैसे बलोच विद्रोही समूह) अफगानिस्तान की जमीन से लगातार पाकिस्तान पर हमले कर रहे हैं। आत्मरक्षा का हमें अधिकार है।”
तालिबान की ओर से भी जवाबी चेतावनी आई। उनके प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा, “अफगानिस्तान की धरती पर हर दुष्कर्म का हिसाब पाकिस्तान को देना होगा। टीटीपी पाकिस्तान का आंतरिक मामला है। आक्रामकता दिखाने के लिए इसे बहाना बनाया जा रहा है।”
इसके बाद उन्होंने कहा, “भारत के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं। लेकिन उससे पाकिस्तान के साथ दुश्मनी का सवाल क्यों उठ रहा है?”
इसके तुरंत बाद पाकिस्तान सेना के जनसंपर्क विभाग के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद ने कहा, “पाकिस्तान की जमीन पर हमले भारत ही करवा रहा है। अफगानिस्तान को आधार बनाकर और तालिबान की मदद से भारत पाकिस्तान में लगातार हमले करा रहा है। पाकिस्तान में हर आतंकी घटना के पीछे भारत का हाथ है।”
उन्होंने चेतावनी दी, “अफगानिस्तान को चुनना होगा कि वह किसके साथ है। हमारे साथ रहेगा तो बेहतर, नहीं तो हम जानते हैं क्या करना है।”
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इशारों में भारत की ओर संकेत करते हुए कहा, “हम अपनी रक्षा करना जानते हैं। चाहे देश की पूर्वी सीमा हो या पश्चिमी, हमारी सेना हमेशा तैयार है, यह सब पहले भी देख चुके हैं।”
शुक्रवार रात तक इस मुद्दे पर नई दिल्ली की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। हालांकि हाल के दिनों में भारत कई बार स्पष्ट कर चुका है कि वह अफगानिस्तान की संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार है।
गुरुवार रात भारतीय समयानुसार लगभग साढ़े 11 बजे पाक वायुसेना के लड़ाकू विमान अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गए। सबसे बड़ा हमला काबुल में किया गया। शुक्रवार सुबह खबर फैली कि तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा मारे गए हैं, हालांकि देर रात तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
तालिबान ने दावा किया कि उन्होंने इस्लामाबाद में शहबाज शरीफ के आवास के पास ड्रोन हमला किया, जिसे पाकिस्तान ने खारिज कर दिया। पाकिस्तान का दावा है कि उनके हमलों में लगभग 300 तालिबान लड़ाके मारे गए। जवाबी हमले में लगभग 15 पाकिस्तानी जवानों की मौत की भी उन्होंने पुष्टि की।
वहीं तालिबान का दावा है कि उनके 8 जवान शहीद हुए, जबकि जवाबी कार्रवाई में कम से कम 70 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। अफगानिस्तान ने दावा किया कि पाकिस्तान के दो सैन्य अड्डे और 19 सैन्य चौकियां उनके नियंत्रण में हैं। भारतीय समयानुसार रात 9 बजे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ शहबाज शरीफ ने बैठक की।
इससे पहले शुक्रवार भर कई देशों ने युद्ध रोकने की अपील की। रात में पाकिस्तान और मिस्र के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हुई। इससे पहले कतर और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच भी वार्ता हुई। ब्रिटेन और मलेशिया ने संघर्ष रोकने की अपील की। शाम के समय चीन ने मध्यस्थता की पेशकश की। लगभग उसी समय रूस ने दोनों देशों को संदेश दिया-“युद्ध से अंततः नुकसान ही होता है।”
इसी बीच सऊदी अरब से पाकिस्तान को फोन आया। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि सऊदी अरब को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है।