दुबई/तेहरानः अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर बड़े पैमाने का हवाई हमला किया, जिसे “ऑपरेशन लायंस रोअर” कहा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता से अपील की कि वे देश के इस्लामिक नेतृत्व के खिलाफ उठ खड़े हों और “अपने भाग्य पर नियंत्रण लें।” इस हमले में कई उच्च-स्तरीय सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अगले निशाने पर हो सकते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि शीर्ष नेताओं की स्थिति क्या है और उनके हताहत होने पर भी तुरंत शासन परिवर्तन की गारंटी नहीं है।
सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई: ईरान की सत्ता का अंतिम केंद्र
अयातुल्ला खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता हैं। उन्होंने 1979 की ईरानी क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर-इन-चीफ के रूप में सैन्य और धार्मिक नियंत्रण रखते हैं। खामेनेई किसी भी सैन्य, कूटनीतिक या धार्मिक निर्णय में अंतिम निर्णयकर्ता हैं। शनिवार को हमले उनके कार्यालय के पास हुए, लेकिन उनकी स्थिति और सुरक्षा के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।
प्रशासनिक नेतृत्व: राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन जुलाई 2024 से पद पर हैं। वे प्रशासनिक और आर्थिक नीतियों के कार्यान्वयन में सर्वोच्च नेता के आदेशों का पालन कराते हैं। पहला उप-राष्ट्रपति मोहम्मद रेज़ा अरेफ राष्ट्रपति के प्रमुख डिप्टी हैं और कैबिनेट संचालन तथा संसदीय संबंधों में अहम भूमिका निभाते हैं।
कूटनीति और विदेश नीति
विदेश मंत्री अब्बास अरागची ईरान के लंबे समय से सक्रिय कूटनीतिज्ञ हैं। वे 2015 के परमाणु समझौते में मुख्य वार्ताकार रहे और हाल ही में अमेरिकी हमलों से पहले शांति वार्ता के पक्ष में अपनी रुचि जाहिर कर चुके थे। खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर वलयाती और कमाल खराजी अंतरराष्ट्रीय मामलों और परमाणु नीति के विशेषज्ञ हैं।
पारिवारिक प्रभाव और संभावित उत्तराधिकारी
खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई मध्य-स्तरीय धर्मगुरु हैं और रिवोल्यूशनरी गार्ड के साथ करीबी संबंध रखते हैं। उन्हें अक्सर भविष्य के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है। उनका प्रभाव मुख्यतः सैन्य और धार्मिक नीति में देखा जाता है।
ईरान के शीर्ष नेता और अमेरिकी–इजराइल हमलों का प्रभाव
ईरान का नेतृत्व एक केंद्रीकृत संरचना पर आधारित है, जिसमें सर्वोच्च नेता के इर्द-गिर्द सभी राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य ताकतें केंद्रित हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड, गार्जियन काउंसिल और वरिष्ठ सलाहकार ईरान की नीति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों में खामेनेई के निर्णयों के अनुसार कार्य करते हैं।
हालिया अमेरिकी और इजराइल के हमलों ने ईरानी नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय ध्यान में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष नेताओं को निशाना बनाने से तत्काल राजकीय परिवर्तन की संभावना नहीं है क्योंकि ईरान में धार्मिक और राजनीतिक पदाधिकारी आपसी कनेक्शन और अनुशासन के कारण स्थिरता बनाए रखते हैं।
वर्तमान स्थिति यह संकेत देती है कि ईरान का नेतृत्व सैन्य और कूटनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और आंतरिक असंतोष के कारण नेतृत्व को नए तनावों का सामना करना पड़ सकता है।