इस्लामाबाद: पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोमवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान अपनी धरती या किसी पड़ोसी देश की जमीन को अपने खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देगा। संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी ताकत -चाहे घरेलू हो या विदेशी - पड़ोसी क्षेत्र का उपयोग कर पाकिस्तान को अस्थिर नहीं कर सकेगी।
विपक्षी सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के बीच दिए गए अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने हालिया संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकी समूहों की मौजूदगी को क्षेत्र से बाहर तक खतरा बताया गया है। उन्होंने कहा कि यदि इस समस्या को नजरअंदाज किया गया तो कोई अन्य देश भी विनाशकारी हमले का शिकार हो सकता है।
जरदारी ने कहा कि पिछले सप्ताह तक पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से होने वाली आतंकी घुसपैठ को रोकने के लिए हर संभव कूटनीतिक प्रयास किया। लेकिन इसके बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने दोहा में किए गए उन वादों की भी याद दिलाई, जिनमें अफगान पक्ष ने अपनी जमीन से आतंकी गतिविधियों की अनुमति न देने का आश्वासन दिया था।
राष्ट्रपति ने कहा कि अफगानिस्तान का मौजूदा प्रशासन विभिन्न आतंकी संगठनों को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराता रहा है। उन्होंने अफगान तालिबान से अपील की कि वे संघर्ष और युद्ध की अर्थव्यवस्था पर निर्भर समूहों को समाप्त करने का निर्णय लें और किसी अन्य देश की महत्वाकांक्षाओं के लिए युद्धभूमि बनने से बचें।
ईरान पर हमले की निंदा
जरदारी ने ईरान पर उस समय जारी सैन्य कार्रवाई की निंदा की, जब वार्ता प्रक्रिया चल रही थी। उन्होंने ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की पुष्टि की और उसे “भाईचारे वाला देश” बताया।
उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर और सऊदी अरब पर हुए हमलों की भी आलोचना की। साथ ही ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर शोक व्यक्त किया। कश्मीर, जल संधि और फिलिस्तीन पर पाकिस्तान का रुख दोहराया।
राष्ट्रपति ने कहा कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपना कूटनीतिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा। उनका कहना था कि जब तक कश्मीरियों को स्वतंत्रता नहीं मिलती, दक्षिण एशिया में स्थायी शांति संभव नहीं है।
भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के कदम पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे “हाइड्रो-टेररिज्म” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह जीवनदायिनी जलधाराओं का राजनीतिक दबाव के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल है।
फिलिस्तीन के मुद्दे पर उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान 1967 से पूर्व की सीमाओं के साथ एक स्वतंत्र और अविभाजित फिलिस्तीनी राज्य के गठन का समर्थन करता रहेगा, जिसकी राजधानी अल-कुद्स अल-शरीफ हो।
हंगामे के बीच पूरा हुआ संबोधन
यह राष्ट्रपति के रूप में जरदारी का संसद के संयुक्त सत्र में नौवां संबोधन था। भाषण के दौरान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सदस्यों ने “गो जरदारी गो” और “इमरान खान को रिहा करो” जैसे नारे लगाए। हालांकि हंगामे के बावजूद राष्ट्रपति ने अपना पूरा संबोधन शांतिपूर्वक समाप्त किया।