नयी दिल्लीः पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े युद्ध की चपेट में है। पिछले तीन दिनों में हालात तेजी से बिगड़े हैं और संघर्ष ने गंभीर रूप ले लिया है। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों से ईरान को भारी नुकसान पहुंचा है, जबकि तेहरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। पूरे क्षेत्र में तनाव, अनिश्चितता और डर का माहौल है।
ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ और ‘रोरिंग लायन’: हमलों की शुरुआत
यह दौर तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी से अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त रूप से हवाई हमले शुरू किए। अमेरिका ने इस सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया है, जबकि इजराइल इसे ‘रोरिंग लायन’ कह रहा है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘अल जजीरा’ की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान के परमाणु केंद्र, मिसाइल बेस और नौसैनिक ठिकाने रहे।
शनिवार को हुए एक बड़े एयरस्ट्राइक में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्ला अली खामेनेई के दफ्तर को सीधे निशाना बनाया गया। इस हमले में उनकी मृत्यु हो गई। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कई वरिष्ठ कमांडर और ईरान के रक्षा मंत्री भी मारे गए।
इसके अलावा, ‘रेड क्रिसेंट’ के हवाले से बताया गया है कि एक बालिका विद्यालय पर हुए हमले में 100 से अधिक छात्राओं की मौत हुई है। ‘अल जजीरा’ के डेथ टोल ट्रैकर के अनुसार, अब तक ईरान में कुल मृतकों की संख्या 555 के पार पहुंच चुकी है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई: युद्ध की ओर बढ़ते कदम
शीर्ष नेतृत्व को भारी नुकसान के बावजूद ईरान ने पलटवार शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार, अंतरिम परिषद के निर्देश पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए गए हैं। ‘रॉयटर्स’ और ‘द गार्जियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल के जेरूसलम के पास रिहायशी इलाकों में ईरानी ड्रोन और मिसाइल गिरे हैं।
ईरान ने सिर्फ इजराइल ही नहीं, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है।
इन हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। ईरान, इराक, इजराइल, कुवैत, बहरीन और कतर सहित कई देशों में वाणिज्यिक उड़ानें बंद कर दी गई हैं।
लेबनान और इराक तक फैला संघर्ष
युद्ध के तीसरे दिन हालात और जटिल हो गए। ईरान समर्थित लेबनान के संगठन हिज्बुल्लाह ने इजराइल पर रॉकेट हमले शुरू किए। इजराइल ने जवाब में लेबनान की राजधानी बेरूत के पास हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 31 लोगों की मौत हुई - यह जानकारी ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने दी है।
इराक में भी अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले
इसी बीच कुवैत में एक बड़ी घटना सामने आई। सीएनबीसी और ‘द गार्जियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम की गलती से ‘फ्रेंडली फायर’ में अमेरिका के तीन F-15 लड़ाकू विमान नष्ट हो गए।
ट्रंप का बयान और आगे की रणनीति
‘सीबीएस न्यूज’ और ‘यूरोन्यूज’ को दिए साक्षात्कार में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह सैन्य अभियान “निर्धारित समय से पहले” समाप्त हो सकता है। उनका दावा है कि 4–5 सप्ताह या उससे कम समय में यह संकट खत्म हो सकता है।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता को पूरी तरह समाप्त करना है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस दौरान और अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है। ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ (ISW) और ‘रॉयटर्स’ के विश्लेषण के अनुसार, इस समय तेहरान के आसमान पर अमेरिका और इजराइल की सामरिक बढ़त है।
हालांकि ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की स्थिति फिलहाल तुरंत बनती नहीं दिख रही है। ‘अल जजीरा’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने न तो पीछे हटने और न ही आत्मसमर्पण के संकेत दिए हैं। अंतरिम परिषद ने साफ कहा है -“अब कोई बातचीत नहीं, बदला लिया जाएगा।”
विश्लेषकों का मानना है कि हिज़्बुल्लाह, हाउथी और इराकी गुटों के जरिए यह संघर्ष बहु-मोर्चीय युद्ध का रूप ले सकता है और लंबे समय तक चल सकता है। इसके अलावा वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित करने की आशंका भी जताई जा रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है और विशेष रूप से विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
क्या विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहे हालात?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह संघर्ष क्षेत्रीय दायरे में है, लेकिन हालात तेजी से बदल रहे हैं। सीजफायर की संभावना अभी कम दिखाई दे रही है। हालांकि ‘गार्जियन’ के अनुसार, ट्रंप ने कहा है कि “ईरान के नए नेताओं से बातचीत जारी है।” स्थिति इतनी अस्थिर है कि घटनाक्रम दिनों में नहीं, बल्कि घंटों में बदल रहा है।
पश्चिम एशिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां से आगे की दिशा पूरे विश्व की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।