नई दिल्लीः भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने देशभर के 1,03,000 से अधिक स्कूलों में छात्रों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) अभियान पूरा कर लिया है। पिछले छह महीनों से मिशन मोड में चलाए जा रहे इस अभियान से लगभग 1.2 करोड़ स्कूली बच्चों को लाभ मिला है।
UIDAI ने 7 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए आधार में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट को 1 अक्टूबर 2025 से एक वर्ष की अवधि के लिए निःशुल्क कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को समय पर आधार में आवश्यक अपडेट की सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों और विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
स्कूल परिसर में ही हुआ अपडेट
अभियान के तहत स्कूलों में विशेष कैंप लगाए गए, जिससे बच्चों को अपने ही स्कूल परिसर में बायोमेट्रिक अपडेट कराने की सुविधा मिली। इसके अलावा, विद्यार्थी देशभर के किसी भी आधार नामांकन केंद्र या आधार सेवा केंद्र पर जाकर भी अपना अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट कर सकते हैं।
UIDAI ने बताया कि यह उपलब्धि तकनीकी समन्वय के जरिए संभव हुई। सितंबर 2025 में प्राधिकरण ने यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) एप्लिकेशन के साथ सफल एकीकरण किया। इस एकीकरण से स्कूल स्तर पर यह पता लगाना आसान हुआ कि किन बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट लंबित है। इसके आधार पर स्कूलों में कैंप आयोजित कर प्रक्रिया पूरी की गई।
4,000 मशीनों से चल रहा अभियान
वर्तमान में इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 4,000 मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। UIDAI ने संकेत दिया है कि प्रक्रिया को और तेज करने के लिए मशीनों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
क्यों जरूरी है बायोमेट्रिक अपडेट?
पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे का आधार नामांकन करते समय केवल फोटो, नाम, जन्मतिथि, लिंग, पता और जन्म प्रमाणपत्र लिया जाता है। इस उम्र में बच्चों के फिंगरप्रिंट और आइरिस बायोमेट्रिक नहीं लिए जाते, क्योंकि वे पूरी तरह विकसित नहीं होते।
इसलिए 5 वर्ष और 15 वर्ष की आयु पार करने पर बच्चों के लिए फिंगरप्रिंट और आइरिस अपडेट कराना अनिवार्य है। यह अपडेट सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, छात्रवृत्ति प्राप्त करने और NEET, JEE, CUET जैसी प्रतियोगी एवं विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाओं में पंजीकरण के दौरान पहचान सत्यापन में मदद करता है।
UIDAI का यह अभियान आधार से जुड़े प्रक्रियागत सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे लाखों विद्यार्थियों को सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।