अमरावती: आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने मंगलवार को हनुमान प्रोजेक्ट की शुरुआत की। इसका उद्देश्य राज्य में मानव और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकना और लोगों, पशुओं तथा जंगलों की सुरक्षा करना है। मंगलागिरी स्थित आंध्र प्रदेश स्पेशल पुलिस छठी बटालियन परेड ग्राउंड में कार्यक्रम के दौरान उन्होंने 100 रैपिड रिस्पॉन्स और रेस्क्यू वाहनों को हरी झंडी दिखाई। इनमें वन्यजीवों के इलाज के लिए एंबुलेंस भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि हनुमान प्रोजेक्ट का मकसद मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना और राज्यभर में जान-माल की रक्षा करना है। उन्होंने 'वसुधैव कुटुंबकम' का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति संतुलन और वन्यजीव संरक्षण मानव जीवन के लिए जरूरी है। सरकार ने बताया कि फसलों के नुकसान, मवेशियों की मौत और लोगों की सुरक्षा पर खतरे की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह योजना शुरू की गई है। हनुमान का पूरा नाम है - हीलिंग एंड नर्चरिंग यूनिट्स फॉर मॉनिटरिंग, एड एंड नर्सिंग ऑफ वाइल्डलाइफ।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत 93 रैपिड रिस्पॉन्स वाहन, 7 एंबुलेंस, 19 रेस्क्यू टीमें और 4 वन्यजीव बचाव एवं उपचार केंद्र बनाए गए हैं। गांव स्तर पर वज्र टीम नाम से वन्यजीव रक्षक तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें सांप और अन्य जानवरों से जुड़े मामलों से निपटने के लिए प्रशिक्षण और किट दी जा रही है।पवन कल्याण ने बताया कि 2025-26 में 2100 से अधिक मामलों में 4 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया। वन्यजीव हमले में मौत पर अनुग्रह राशि 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है।
चित्तूर, श्रीकाकुलम और पार्वतीपुरम मन्यम जिलों में हाथियों की समस्या से निपटने के लिए कर्नाटक से चार प्रशिक्षित कुमकी हाथी बुलाए गए हैं। अब तक आठ अभियान सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। उपमुख्यमंत्री ने हनुमान डिजिटल ऐप भी लॉन्च किया। जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखने और समय रहते चेतावनी देने के लिए एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम भी शुरू किया जा रहा है।