पश्चिम एशिया में मिसाइल और युद्ध विमानों की तेज आवाजें लगातार गूंज रही है। युद्ध की आग तेजी से फैलती जा रही है। ऐसी परिस्थिति में ईरान (Iran) अमेरिका (America) के साथ बातचीत करना चाहता था लेकिन...!
दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस प्रस्ताव को सीधे नकार दिया है। मंगलवार को यह दावा करते हुए ट्रंप ने खुद ही सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मैंने साफ कह दिया है, अब बहुत देर हो चुकी है। इसके साथ ही ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की एयर डिफेंस, नेवी, एयरफोर्स भी नष्ट हो चुकी है।
इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर पूरी ताकत के साथ प्रहार किया है। एक के बाद एक मिसाइलों से हमला किया जा रहा है। एयरस्ट्राइक में ईरान की सैन्य खुफिया विभाग को नष्ट कर दिया गया है। बताया जाता है कि राष्ट्रीय मीडिया ऑफिस पर भी हमला किया गया है। हालांकि ईरान भी चुप नहीं बैठा है। तेल अवीव से लेकर अबुधाबी और दुबई तक ड्रोन और मिसाइलों से लगातार इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स हमला कर रहे हैं। रियाध और कुवैत में अमेरिकी दूतावास पर भी हमला किया गया था।
ऐसी परिस्थिति में ईरान के साथ बातचीत के प्रस्ताव को अस्वीकार करने की जानकारी डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दी। ट्रुथ सोशल पर उन्होंने लिखा है, 'ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम, एयर फोर्स, नेवी नष्ट हो चुकी है। अब वे बातचीत करना चाहते हैं। लेकिन मैंने कह दिया है कि अब बहुत देर हो चुकी है।' हालांकि कुटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इतनी आसान नहीं है जितनी दिखाई दे रही है। दो दिनों पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद ही बातचीत करने की बात कही थी।
अट्लांटिक की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ट्रंप ने कहा है कि मैं बातचीत करने के लिए राजी हूं। उनके (ईरान) साथ बात करुंगा। 48 घंटों के अंदर ऐसा क्या हुआ कि ट्रंप अब बात करने के लिए राजी नहीं हैं?
बदले की आग में ईरान जल रहा है। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने स्पष्ट कर दिया है कि सर्वोच्य नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने से पहले वे रुकने वाले नहीं हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, पश्चिम एशिया में अमेरिका के सभी सैन्य ठिकानों पर भी हमला करने की धमकी ईरान ने दी है। इस काम को शुरू भी कर दिया गया है। बहरीन में अमेरिका की नौसेना के पंचम वाहिनी के सदर ऑफिस पर इस्लामिक गार्ड ने हमला किया था। ऐसी परिस्थिति में ट्रंप के बातचीत से इनकार करने वाले बयान से लोगों को ताज्जुब हो रहा है।