इस्लामाबादः अमेरिका और इज़राइल द्वारा मिलकर ईरान पर किये गये हवाई हमलों और ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत को लेकर अमेरिका के खिलाफ देश में गुस्सा भड़क गया। पाकिस्तान में लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने पाकिस्तान के कराची और लाहौर स्थित अपने वाणिज्य दूतावासों (कांसुलेट) से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया है।
1 मार्च को कराची में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी कांसुलेट की सुरक्षा घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान झड़प में 10 से अधिक लोगों की मौत हो गई। इसी तरह के विरोध प्रदर्शन लाहौर और इस्लामाबाद में भी हुए।
इन घटनाओं के बाद अमेरिका को अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। इसलिए अमेरिकी विदेश विभाग ने फैसला किया कि जो कर्मचारी जरूरी काम में शामिल नहीं हैं और उनके परिवार, उन्हें फिलहाल पाकिस्तान छोड़ देना चाहिए।
अमेरिकी मिशन ने कहा है कि इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास की स्थिति में अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है।
अमेरिका ने यह भी चेतावनी दी है कि मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ईरान की ओर से ड्रोन या मिसाइल हमले का खतरा बना हुआ है और कई जगहों पर हवाई उड़ानों में भी बाधा आ रही है।
इसी वजह से अमेरिका ने सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि जॉर्डन, बहरीन, इराक, कुवैत, कतर, यूएई, सऊदी अरब, ओमान और साइप्रस जैसे देशों में भी अपने कर्मचारियों के लिए सुरक्षा संबंधी निर्देश जारी किए हैं।