नई दिल्ली : दुनिया के विकसित देशों के छात्रों को भारत में पढ़ाई के लिए उत्साहित करने पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विशेष जोर दिया। शुक्रवार को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के तहत उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में ऐसा शैक्षिक ढांचा तैयार करना होगा कि विदेशी छात्र यहां आकर पढ़ाई करने के लिए उत्साहित हों।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड द्वारा आयोजित 'वाइस चांसलर्स कॉन्क्लेव' में भाषण देते हुए मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय शिक्षा विनिमय बढ़ाने के लिए डुअल डिग्री या संयुक्त पाठ्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
तीन साल के किसी पाठ्यक्रम को इस तरह से तैयार किया जा सकता है कि छात्र एक वर्ष भारत में और शेष दो वर्ष अपने देश के विश्वविद्यालय में पढ़ाई करें। इसे दोनों संस्थानों में बराबर समय विभाजित करके भी आयोजित किया जा सकता है। उनके अनुसार ऐसे पाठ्यक्रम विकसित देशों के छात्रों को विकासशील देशों की सोच, काम करने का तरीका, संस्कृति और समाज के बारे में सीधे अनुभव प्रदान करने में मदद करेंगे।
साथ ही उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों को समय के साथ तालमेल बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक केवल पाठ्यक्रम ही नहीं, शिक्षकों को भी नियमित प्रशिक्षण और री-स्किलिंग के माध्यम से आधुनिक ज्ञान और भविष्योन्मुखी कौशल के साथ अपडेट रहना चाहिए।
गोयल के अनुसार भारत के वाणिज्य, उत्पादन और सेवा क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाने के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव बढ़ाना आवश्यक है।'
वर्तमान में जब एक विदेशी छात्र भारत में पढ़ाई करने आता है, तो लगभग 28 भारतीय छात्र विदेश में पढ़ाई करते हैं। इस असमान अनुपात को भविष्य में बदलने की संभावना है, इस बात पर गोयल आशावादी हैं। उनका मानना है कि आने वाले समय में भारत के शैक्षणिक संस्थान लगभग 13 लाख विदेशी छात्रों को आकर्षित कर सकेंगे और तुलनात्मक रूप से बहुत कम भारतीय छात्र विदेश में पढ़ाई करेंगे।