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भारत की चाय निर्यात को संकट में डाल सकता है अमेरिका-ईरान विवाद

2025 में भारत का चाय निर्यात 28.1 करोड़ किलोग्राम तक पहुंचकर अब तक का सबसे उच्च रिकॉर्ड बना था।

नई दिल्ली : अगर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष की अवधि और कुछ हफ्तों तक बढ़ती है, तो भारत के चाय निर्यात को झटका लग सकता है, ऐसा उद्योग विशेषज्ञ मान रहे हैं। 2025 में भारत का चाय निर्यात 28.1 करोड़ किलोग्राम तक पहुंचकर अब तक का सबसे उच्च रिकॉर्ड बन गया था। लेकिन वर्तमान स्थिति उस वृद्धि को रोक सकती है, ऐसी चिंता व्यक्त की जा रही है।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार भारत के कुल चाय निर्यात का लगभग 60 प्रतिशत पश्चिम एशिया और कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स क्षेत्र में जाता है। इस निर्यात का बड़ा हिस्सा होरमूज जलसंधि के माध्यम से समुद्री मार्ग से परिवहन किया जाता है। वर्तमान में उस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में अस्थिरता के कारण कई जहाज रुके हुए हैं, जिससे व्यापार पर असर पड़ सकता है।

इंडियन टी एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अतुल रस्तोगी कहते हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध के समय अफ्रीका का बाजार अधिक प्रभावित हुआ था। लेकिन इस बार चाय के मामले में भारत और श्रीलंका सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिपिंग लागत बढ़ेगी, और इसका असर पड़ेगा। रस्तोगी ने आगे बताया कि अगर ईरान में शासन परिवर्तन होता है और अमेरिका की वित्तीय पाबंदियां कम होती हैं, तो भारत के लिए ईरान के बाजार में और अधिक प्रवेश का अवसर बन सकता है। ईरान भारतीय चाय का एक बड़ा बाजार है।

2025 में पश्चिम एशिया में भारत का चाय निर्यात 12.1 करोड़ किलोग्राम था। इसमें से संयुक्त अरब अमीरात में लगभग 5.07 करोड़ किलोग्राम चाय गई। इराक में लगभग 5.2 करोड़ किलोग्राम, ईरान में 1.06 करोड़ किलोग्राम और सऊदी अरब में लगभग 67 लाख किलोग्राम चाय भारत से निर्यात की गई।

कॉमनवेल्थ क्षेत्र में कुल निर्यात 4.3 करोड़ किलोग्राम था, जिसमें लगभग 3.1 करोड़ किलोग्राम रूस को भेजा गया। कजाखस्तान समेत अन्य देशों को भी चाय निर्यात हुई। कुल मूल्य के हिसाब से 2025 में भारत के चाय निर्यात का मूल्य लगभग 8,500 करोड़ रुपये था। इसमें मध्य पूर्व में निर्यात का मूल्य लगभग 3,300 करोड़ रुपये और कॉमनवेल्थ क्षेत्र में लगभग 842 करोड़ रुपये था।

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल टी ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गोपाल चक्रवर्ती ने बताया कि अमेरिका-ईरान संघर्ष ने भारतीय चाय निर्यात के सामने तीन बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ये हैं—लॉजिस्टिक समस्याएं, बाजार में सुस्ती और स्थानीय चाय की कीमतों पर प्रभाव। उन्होंने आगे कहा कि असम की सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाली ऑर्थोडॉक्स चाय का बड़ा बाजार ईरान और इराक में है। पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति लंबे समय तक चाय व्यापार पर असर डाल सकती है।

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