कोलकाता : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एसपीके जैन फ्यूचरिस्टिक अकादमी में वर्ष 2026 का महिला दिवस प्रेरणा, संवाद और सम्मान से भरे एक विशेष कार्यक्रम के साथ मनाया गया। इस आयोजन में जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से आईं अनेक प्रतिष्ठित और सफल महिलाओं ने भाग लिया और अपने अनुभवों के माध्यम से नेतृत्व, उदारता और सामाजिक योगदान के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का आयोजन इस वर्ष की वैश्विक विषय-वस्तु ‘देकर पाओ’ (गिव टू गेन) को केंद्र में रखकर किया गया। इस विषय के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समाज के साथ उपलब्धियों को साझा करने से ही सफलता का वास्तविक अर्थ सामने आता है। इस अवसर पर उन महिलाओं को सम्मानित किया गया जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करने के साथ-साथ समाज के प्रति निरंतर योगदान दिया है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुदेश्ना रॉय, प्रणति ठाकुर, चैतालि दास, डोमा वांग, लिली प्रधान, कमलिनी पाल, प्रतिभा चक्रवर्ती और डॉ. मौमिता राणा उपस्थित रहीं। सभी वक्ताओं ने अपने जीवन की यात्रा साझा करते हुए अपने सामने आई चुनौतियों, उनसे मिली सीख और उन मूल्यों के बारे में बताया जिन्होंने उनके मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कला, उद्यमिता, लोक सेवा और सामाजिक कार्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अपने अनुभवों के माध्यम से उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वास्तविक जीवन में “देकर पाओ”(गिव टू गेन) का कितना महत्व है। वक्ताओं ने कहा कि समय, ज्ञान, साहस और संवेदनशीलता के साथ दिया गया योगदान न केवल व्यक्ति के जीवन को समृद्ध करता है, बल्कि समाज पर भी सकारात्मक और स्थायी प्रभाव छोड़ता है।
विद्यालय की प्राचार्या डॉ. जयिता गांगुली ने अपने संबोधन में कहा कि “देकर पाओ”(गिव टू गेन) का मूल भाव यह है कि ज्ञान, सहयोग, संवेदना और अवसरों को साझा करने का हर प्रयास प्रगति के बीज बोता है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएँ उदारता और संवेदनशीलता के साथ नेतृत्व करती हैं, तो वे केवल अपनी राह ही नहीं बदलतीं, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती हैं।
कार्यक्रम ने यह विश्वास मजबूत किया कि जब महिलाएँ उद्देश्य, संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प के साथ नेतृत्व करती हैं तो परिवर्तन केवल संभव ही नहीं बल्कि प्रभावशाली और दूरगामी भी होता है। विभिन्न क्षेत्रों की प्रेरणादायक महिलाओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को सीख, प्रेरणा और विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बना दिया।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि आने वाली पीढ़ी को ऐसे मूल्यों के साथ आगे बढ़ाया जाए जो यह समझे कि सच्चा नेतृत्व देने की भावना में निहित है क्योंकि सबसे बड़ी उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि समाज पर छोड़ा गया सकारात्मक प्रभाव है।