पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा अभी तक नहीं हुई है लेकिन चुनावी पारा दिन-प्रतिदिन चढ़ता जा रहा है। ऐसी स्थिति में गुरुवार की शाम को अचानक राज्य के राज्यपाल सीवी आनंद बोस (CV Anand Bose) ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि अपने पदत्याग की वजह उन्होंने स्पष्ट नहीं किया है।
दिल्ली जाकर राष्ट्रपति को उनका इस्तीफा सौंपने के कुछ घंटों के अंदर ही पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के तौर पर आर एन रवि को नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज से पोस्ट शेयर कर बताया कि इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें जानकारी दी है।
बता दें, आर. एन. रवि पहले तमिलनाडु के राज्यपाल थे। वहां से हटाकर उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। ममता बनर्जी ने अपने पोस्ट में बताया है कि सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफा देने से वह अचंभित हैं। कल देर शाम को किए अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि अभी-अभी केंद्रीय गृह मंत्री ने मुझे इस बात की जानकारी दी लेकिन नियमानुसार उन्होंने मेरे साथ कोई सलाह-मशवरा नहीं किया।
कौन हैं बंगाल के नए राज्यपाल आर.एन. रवि?
आर. एन. रवि का पूरा नाम रवींद्र नारायण रवि है। उनके पास प्रशासनिक कार्यों का लंबा अनुभव है। वह 1976 बैच के केरल कैडर के अधिकारी हैं। किसी जमाने में देश के जासूसी विभाग में स्पेशल डायरेक्टर के तौर पर भी वह काम कर चुके हैं। इसके साथ ही आर.एन. रवि डेप्यूटी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर भी रह चुके हैं। बताया जाता है कि माओवादी इलाकों में विद्रोह का दमन करना हो या नागा शांति बैठक हो, कई महत्वपूर्ण समय में वह केंद्र सरकार के लिए तुरुप का इक्का रह चुके हैं।
बतौर आईपीएस अधिकारी वर्ष 2012 में उन्होंने रिटायरमेंट लिया था। इसके बाद 2019 में नागालैंड का राज्यपाल बनाकर उन्हें भेजा गया। साथ में मेघालय के अतिरिक्त राज्यपाल की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली थी। इसके बाद उन्हें तमिलनाडु का राज्यपाल बनाया गया।
मुख्यमंत्री स्टैंलिन के साथ संघर्ष
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टैंलिन के साथ उनके संघर्ष की खबरें आम हैं। सरकारी फाईलों को रोक कर रखने का आरोप लगाते हुए स्टैंलिन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। यहां तक कि उन्होंने राष्ट्रपति से भी आर. एन. रवि को बर्खास्त करने की सिफारिश तक कर डाली थी।
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। उनकी नियुक्ति को लेकर ममता बनर्जी ने अपनी नाराजगी भी जतायी है। उनका आरोप है कि इस पूरे प्रकरण के दौरान उन्हें अंधेरे में रखा गया था। उन्होंने लिखा है, 'यह कदम भारत के लोकतांत्रिक संरचना पर किया गया वार है। राज्य की मर्यादा को भंग कर इस प्रकार के एकतरफा फैसलों को लेने से बचना चाहिए।'