SIR के अंतिम पड़ाव पर पश्चिम बंगाल के अंतिम मतदाता सूची में लगभग 60 लाख से अधिक मतदाताओं का नाम विचाराधीन अथवा 'अंडर एजूडिकेशन' के तौर पर चिह्नित किया गया है। वहीं लगभग 5 लाख 46 हजार मतदाताओं का नाम 'डिलिट' किया जा चुका है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद राज्य में डर का माहौल व्याप्त है और इस वजह से अब तक लगभग 8 लोगों की मौत हो चुकी है।
'विचाराधीन' के तौर पर चिह्नित कोई मतदाता वर्तमान में अस्पताल में इलाजरत है तो किसी का शव अपने ही घर में फंदे से लटकता हुआ बरामद किया गया था। वहीं इस आतंक की वजह से दिल का दौरा पड़ने से भी पश्चिम मिदनापुर में एक मतदाता की मौत होने का दावा किया जा रहा है। दक्षिण 24 परगना जिले के भांगड़ में एक 48 वर्षीया महिला की मौत SIR की वजह से होने का दावा तृणमूल कर रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि उक्त महिला का नाम मतदाता सूची से 'डिलिट' कर दिया गया है।
राज्य में लगातार खौफ और आतंक की वजह से मतदाताओं के बीमार पड़ने को लेकर तृणमूल नेता एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। बंगाल में स्पेशल इनटेंसिव रिविजन (SIR) के शुरुआत से ही ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने डर व आतंक की वजह से राज्य में हो रहे लोगों की मौतों को लेकर अपनी आवाज उठायी थी। तृणमूल ने इन मौतों के लिए देश के चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया था।
अब इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कल (शुक्रवार) को धरना पर बैठने का फैसला लिया है। रविवार को इस बात की घोषणा तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने की थी। शुक्रवार को ममता बनर्जी धर्मतल्ला के वाई चैनल पर धरने पर बैठने वाली हैं। बताया जाता है कि धर्मतल्ला के धरनामंच से ही मुख्यमंत्री SIR को लेकर आंदोलन के अगले कदम की घोषणा करेंगी।
तृणमूल का आरोप है कि चुनाव आयोग ने जिस प्रकार से 'अंडर एजूडिशकेशन' सूची में लाखों लोगों का नाम शामिल किया है, उससे आम लोगों में डर का माहौल बन गया है। इसके विरोध में ही मुख्यमंत्री कल धरना देने वाली हैं। धरनामंच को बनाने का काम भी शुरू हो चुका है। बता दें, मेट्रो चैनल पर हेयर स्ट्रीट थाना का जो आउटपोस्ट है, उसके ठीक सामने ही धरना का मुख्य मंच तैयार किया जा रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी के इस धरना का प्रचार कर रही है।
धरना को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने जहां कटाक्ष करते हुए कहा है कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति धरना पर बैठ सकता है। लेकिन उनके (ममता बनर्जी) सुप्रीम कोर्ट जाने और धरना पर बैठने का मतलब क्या है? वह सांविधानिक संस्थान पर दबाव बनाना चाहती हैं। यह चुनाव आयोग का मामला है। वह क्या करेंगी इस बारे में हम नहीं सोच रहे हैं। हमारी स्पष्ट मांग है कि सुनवाई की प्रक्रिया पूरी किए बगैर चुनाव नहीं होगा।
वहीं इसका जवाब देते हुए तृणमूल के प्रवक्ता अरुप चक्रवर्ती ने कहा कि ममता बनर्जी हमेशा से ही लोगों को साथ लेकर लोगों के हितों की रक्षा के लिए ही सड़कों पर उतरती हैं। भाजपा नेता एसी कमरों में बैठे रहते हैं। जिस समय बंगाल के लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है, लोगों की मौत हो रही है, तब एकमात्र ममता बनर्जी ही इसका विरोध कर रही हैं। मेट्रो चैनल के धरना मंच से वह इसका ही विरोध करेंगी।