वॉशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बहुत देर हो चुकी है। अब कोई समझौता नहीं होगा। इसी बीच शुक्रवार रात पश्चिम एशिया में युद्ध की तीव्रता बढ़ाते हुए अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पूरे ईरान में सैन्य हमले की चेतावनी दी। उन्होंने संकेत दिया कि जिन कारखानों में मिसाइलें बनती हैं उन्हें निशाना बनाया जाएगा।
इस दिन स्कॉट बेसेंट लैरी कुडलो के टीवी शो में शामिल हुए थे। वहीं उन्होंने कहा कि हमारा सबसे बड़ा बमबारी अभियान शुरू होने वाला है। ईरान के मिसाइल लॉन्चर और जिन कारखानों में मिसाइलें बनती हैं, उन्हें हम पूरी तरह नष्ट कर देंगे।
ईरान ने भी धमकी दी है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिका और इजराइल के किसी भी जहाज को गुजरने नहीं देगा। इस पर चिंता जताते हुए बेसेंट ने दावा किया कि अमेरिका के शक्तिशाली हमले का सामना करने से बचने के लिए ईरान अब आर्थिक अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
इस बीच शुक्रवार रात इजराइल ने तेहरान में मिसाइल हमला किया। लगभग 50 लड़ाकू विमानों से एक साथ मिसाइलों की बारिश शुरू की गई। इजराइली सेना का दावा है कि आयतोल्ला अली खामेनेई ने युद्ध के लिए जमीन के नीचे गुप्त बंकर बनाकर रखे थे। हालांकि उन्हें उसका उपयोग करने का मौका नहीं मिला। इजराइल की वायुसेना ने उसी भूमिगत ढांचे को निशाना बनाकर हमला किया।
शुक्रवार रात भर तेहरान और केरमानशाह इलाके में विस्फोटों की आवाजें सुनाई देती रहीं। इजराइल का दावा है कि ईरान के अधिकतर एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल लॉन्चर नष्ट हो गए हैं। इस हमले के बाद अरब दुनिया में तनाव और बढ़ गया है। जवाब में ईरान ने खाड़ी के कई देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। हालांकि इन हमलों में बड़े नुकसान की खबर नहीं है।
अब तक ईरान पश्चिम एशिया में अमेरिकी दूतावासों को निशाना बना रहा था लेकिन युद्ध के आठवें दिन पूरे पश्चिम एशिया में बेतरतीब हमले शुरू हो गए हैं। इराक के साथ-साथ कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, ओमान और जॉर्डन में लगातार हमले हो रहे हैं।
ईरान के मित्र देश भी अब उससे दूरी बनाने लगे हैं। सऊदी अरब ने भी जवाबी हमले की चेतावनी दी है। ऐसे में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि इससे पश्चिम एशिया में हालात और गंभीर हो सकते हैं।