अंधेरे में डूबा क्यूबा। एक बड़े थर्मोइलेक्ट्रिक प्लांट यानी बिजली घर में खराबी आने के बाद क्यूबा में पूरे देश की बत्ती गुल हो चुकी है जिसकी वजह से लोग अंधेरे में रहने के लिए मजबूर हो रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इस वजह से द्वीप की ऊर्जा का ढांचा कमजोर पड़ने की स्थिति भी पैदा हो गयी है। हालांकि राष्ट्रीय बिजली विभाग के अधिकारी इसे फिर से चालू करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी तक राजधानी हवाना समेत देश के कई हिस्से अंधेरे में डूबे हुए हैं।
बता दें, इस ब्लैकआउट ने क्यूबा में ईंधन की कमी और विद्युत उत्पादन के पुरानी पद्धतियों को लेकर चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। इसी वजह से पिछले कुछ सालों से देश में बार-बार बिजली का कट जाने की समस्याएं सामने आती रही है।
क्यों अंधेरे में डूबा पूरा देश?
मिली जानकारी के अनुसार Antonio Guiteras थर्मोइलेक्ट्रिक प्लांट, जो क्यूबा के सबसे महत्वपूर्ण बिजली घरों में से एक है, वह अचानक बंद पड़ गया है। बताया जाता है कि यह प्लांट देश की बिजली व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्लांट के अचानक ठप्प पड़ जाने की वजह से पूरे देश की विद्युत व्यवस्था प्रभावित हुई है।
कस्बों से लेकर कई शहरों तक में बिजली नहीं होने की वजह से घर, दुकानों और सरकारी ऑफिसों आदि में काम करने वाले लोगों को काफी दिक्कतें हुई। इस वजह से देशभर के कई हिस्सों में लोगों को घंटों अंधेरे में बिताना पड़ा। वहीं अधिकारी विद्युत व्यवस्था को ठीक करने और प्रभावित इलाकों में बिजली व्यवस्था को फिर से शुरू करने की कोशिशें की जा रही हैं।
मिली जानकारी के अनुसार बिजली समस्या की वजह से अस्पतालों से लेकर पेयजल पंपिंग स्टेशन, परिवहन सेवाओं आदि में भी रुकावट पैदा हो रही है। आपातकाल में बिजली सेवाएं जारी रखने के लिए जेनरेटर आदि की मदद ली जा रही है।
ऊर्जा संकट ने ईंधन की कमी को किया उजागर
क्यूबा में आए व्यापक ब्लैकआउट ने एक बार फिर से देश में ईंधन की कमी की समस्या को सबके सामने ला दिया है। गौरतलब है कि क्यूब पिछले कई सालों से आयातित ईंधन के सहारे ही देश में बिजली का उत्पादन करता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से ईंधन के आयात में कमी होने का विद्युतापूर्ति पर भी असर पड़ रहा है।
इसके साथ ही क्यूबा में बिजली का पुराना ढांचा भी इस समस्या को गंभीर बना रहा है। देश के बिजली घर जो कई दशक पहले निर्मित हुए थे उनमें अक्सर तकनीकी खराबियां आती रहती हैं। इस वजह से बिजली की आपूर्ति प्रभावित होती है और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के साथ-साथ देश की आर्थिक गतिविधि पर भी असर पड़ा है।
क्यूबा सहयोगी देश वेनेजुएला उसके लिए सस्ते तेल का मुख्य स्रोत था लेकिन जब से वहां आर्थिक समस्याएं शुरू हुई, तेल की आपूर्ति में भी कमी आ गयी है। इसी दौरान पिछले कई दशकों से चले आ रहे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण क्यूबा के लिए दूसरे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से ईंधन हासिल करना भी मुश्किल सा ही हो गया है। यहीं वजह है कि अब जैसे ही बिजली की मांग बढ़ती है, क्यूबा में बिजली का आना-जाना बहुत आम बात हो गयी है।