नई दिल्ली: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध का बुधवार को 11वां दिन है। देखते ही देखते यह युद्ध कई देशों में फैल गया युद्ध का असर अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर नजर आ रहा है। युद्ध का सबसे अधिक असर तेल के बाजार पर देखा जा रहा है। बुधवार को क्रूड की कीमत करीब 88 डॉलर प्रति बैरल थी, यह तब है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले को सीमित युद्ध बताया था लेकिन अभी इस युद्ध के अंत की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है। ईरान ने अमेरिका को इस युद्ध में बुरी तरह फंसा दिया है।
क्या युद्ध से गर्म है कच्चे तेल का बाजार
युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। सोमवार को कच्चे तेल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं लेकिन बुधवार तक ये घटकर करीब 88 डॉलर प्रति बैरल तक आ गईं। इस बीच गोल्डमैन सैक्स ने रिपोर्ट दी है कि अगर अगले 48 घंटों में तनाव कम नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतें 155 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं। कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) दो महीने में 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने की सिफारिश कर सकती है। इस संगठन की 1970 में हुई स्थापना के बाद पहली बार इतनी अधिक मात्रा में तेल जारी किया जाएगा। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इससे परिवहन लागत, खाद्य कीमतें और औद्योगिक उत्पादन सभी प्रभावित होगा।
क्या अमेरिका-इजरायल ने बातचीत के रास्ते बंद कर दिए हैं
जून 2025 में भी इजरायल-ईरान के बीच 12 दिन तक युद्ध चला था। इसमें इजरायल-अमेरिका ने ईरान के नतांज, फोर्डो और इस्फहान में स्थित परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बमबारी की थी। ये हमले विनाशकारी थे, लेकिन लक्ष्यों की सीमित प्रकृति के कारण बातचीत की गुंजाइश बनी रही। ओमान की मध्यस्थता के बाद 24 जून को यह संघर्ष खत्म हुआ था. ओमान उस समय जिनेवा में चल रही अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता में भी शामिल रहा लेकिन इस बार अमेरिका-इजरायल ने हमला कर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई सैन्य कमांडरों की हत्या कर दी। यह हमला ईरान में सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से किया गया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब ईरान ने खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुन लिया है। ऐसा लगता है कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य रणनीति को समझने में भूल कर दी है। विश्लेषकों का कहना है कि तेहरान पिछले दो दशक से इस युद्ध की तैयारी कर रहा था। ईरान ने सेना के साथ-साथ सर्वोच्च नेता के 'फोर्थ सक्सेसर' (चौथे उत्तराधिकारी) के बैकअप की योजना भी बनाई। इससे शीर्ष नेता के मारे जाने पर भी नेतृत्व का संकट पैदा नहीं हुआ है। यह तब हो रहा है जब डोनाल्ड ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि ईरान की नौसेना और वायुसेना तबाह हो चुकी है। अब ईरानी नेता अमेरिका और इजरायल को बातचीत के लिए विश्वसनीय नहीं बता रहे हैं, जबकि ट्रंप बातचीत की संभावनाएं तलाश रहे हैं।