मॉस्को: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत कर स्थिति को जल्द शांत करने की अपील की है। क्रेमलिन के अनुसार पुतिन ने संघर्ष को कम करने और राजनीतिक व कूटनीतिक माध्यमों से समाधान निकालने की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है, जिसका असर खाड़ी क्षेत्र के कई पड़ोसी देशों तक पहुंच रहा है।
तनाव कम करने पर रूस का जोर
क्रेमलिन ने बयान में कहा कि पुतिन ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को लेकर अपनी “सिद्धांत आधारित स्थिति” दोहराई और जल्द से जल्द तनाव कम करने (डी-एस्केलेशन) की आवश्यकता पर बल दिया।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने इस संकट के दौरान रूस के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया, विशेष रूप से ईरान को प्रदान की गई मानवीय सहायता के लिए। यह इस सप्ताह पुतिन और पेजेशकियन के बीच दूसरी फोन बातचीत थी। रूस, जिसके खाड़ी देशों में महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक हित हैं, क्षेत्रीय संकट को शांत करने के लिए सभी पक्षों के साथ संपर्क बनाए हुए है।
रूस-ईरान विदेश मंत्रियों की भी बातचीत
इसी मुद्दे पर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी मंगलवार को अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से चर्चा की। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार लावरोव ने भी जल्द से जल्द संघर्ष कम करने और राजनीतिक व कूटनीतिक प्रक्रिया फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्रालय ने कहा कि रूस इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद के लिए तैयार है, बशर्ते ईरान और उसके क्षेत्रीय पड़ोसियों की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखा जाए।
ट्रंप-पुतिन के बीच भी हुई बातचीत
पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा सोमवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच भी हुई। क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव के अनुसार दोनों नेताओं के बीच लगभग एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। हालांकि क्रेमलिन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पुतिन ने ईरान संकट के समाधान के लिए कौन से प्रस्ताव पेश किए।
मध्यस्थता की संभावना पर रूस
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि संघर्ष शुरू होने से पहले ही पुतिन ने तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता के कई प्रस्ताव दिए थे।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में रूस को तुरंत मध्यस्थ के रूप में देखना संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए बहुपक्षीय सहमति और समन्वय आवश्यक है। पेसकोव के अनुसार स्थिति को देखते हुए सभी पक्षों को धैर्य रखना होगा और आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया पर ध्यान देना होगा।