ईरान : ईरान के स्कूल पर हमले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच इजरायल-अमेरिका के बीच नया विवाद खुलकर सामने आ गया है। बेंजामिन नेतन्याहू के देश इजरायल ने सप्ताहांत में ईरान के कम से कम 30 तेल डिपो पर हमला किया। इसके कारण भयंकर पर्यावरणीय आपदा की आशंका जता रहे हैं विशेषज्ञ।
ईरान के मानवाधिकार संगठन रेड क्रिसेंट सोसायटी ने तेहरान और उसके आसपास जहरीली बारिश होने की आशंका जताई है। उनके अनुसार तेल गोदामों में विस्फोट के कारण भारी मात्रा में जहरीले हाइड्रोकार्बन, सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड वातावरण में मिलकर बादलों में घुल गए हैं। ऐसे में बारिश होने पर वह बेहद खतरनाक और अम्लीय हो सकती है।
रविवार को तो कई सूत्रों ने दावा किया कि काले बादलों के बीच से चिपचिपे काले तेल जैसी बारिश तेहरान में शुरू भी हो गई है! हालांकि जो भी हो—ईरान को खत्म करने के लिए जितना आतुर इजरायल है, उतना ही अमेरिका भी। लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नेतन्याहू की सेना ईरान के तेल डिपो पर इतनी व्यापक कार्रवाई करेगी, इसका अंदाजा मित्र अमेरिका को भी नहीं था।
यह क्या बकवास है!
यही नहीं, उनसे बात किए बिना इजरायल के इस गैर-जिम्मेदाराना कदम से अमेरिका डोनाल्ड ट्रंप बेहद नाराजगी जता रहें है। अमेरिकी मीडिया एक्सियॉस की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के तेल डिपो पर हमले की खबर मिलते ही व्हाइट हाउस ने तेल अवीव को संदेश भेजा—यह क्या बकवास है!
उधर एक बड़ी खबर यह भी है कि युद्ध के पहले ही दिन अमेरिका ने ईरान के शहर मिनाब में लड़कियों के एक प्राथमिक स्कूल पर हमला किया था! क्योंकि वहां जो टॉमहॉक मिसाइल गिरी है, अमेरिका के अलावा किसी और के पास नहीं है। इसलिए 165 से अधिक स्कूली छात्राओं की मौत के लिए सीधे तौर पर अमेरिकी सेना को जिम्मेदार ठहराते हुए ईरान ने आज पहले पन्ने पर ही ट्रंप के खिलाफ “जिहाद” की घोषणा कर दी।
तेहरान टाइम्स ने हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरों के साथ सोमवार का पहला पन्ना प्रकाशित किया। बड़े अक्षरों में शीर्षक—“ट्रंप लूक देम इन द आईस” संपादकीय में आरोप लगाया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति अब भी बेशर्मी से इस क्रूरता की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
व्हाइट फॉस्फोरस!
लेकिन ईरान के 30 तेल डिपो पर अचानक हमला क्यों? अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हमले से पहले इजरायल प्रशासन ने ट्रंप प्रशासन को बताया था कि इन्हीं तेल डिपो से ईंधन लेकर ईरान मिसाइल हमले कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि अमेरिका ने शुरुआती सहमति तो दी थी, लेकिन हमले का इतना बड़ा दायरा होगा, इसका अंदाजा उसे नहीं था।
इसी बीच खबर आई है कि दक्षिण लेबनान में हमला करते समय इजराइली आर्मी ने कथित तौर पर प्रतिबंधित सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया! यह घटना 3 मार्च की बताई जा रही है। एक मानवाधिकार संगठन का दावा है कि लेबनान के दक्षिण में योहोमोर गांव के रिहायशी इलाके में आर्टिलरी हमले के दौरान इजरायली सेना ने व्हाइट फॉस्फोरस के गोले दागे। हालांकि उस समय वहां आम लोग मौजूद थे या नहीं, या कोई हताहत हुआ या नहीं, यह संगठन भी पुष्टि नहीं कर पाया है।
फिर भी विवाद थम नहीं रहा। क्योंकि सफेद फॉस्फोरस बेहद खतरनाक रासायनिक पदार्थ है, जिसका उपयोग तोप के गोले, बम और रॉकेट में किया जाता है। ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही यह तुरंत जल उठता है और आसपास की हर चीज को जला देता है। अगर यह मानव शरीर पर लग जाए, तो त्वचा तक पिघला सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के अनुसार घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका उपयोग अवैध है।
खामेनेई का पुत्र ही ‘सुप्रीम’
युद्ध के दसवें दिन ईरान जवाबी हमले तो कर रहा है, लेकिन स्थिति उसके पक्ष में नहीं है, यह एहसास उसे हो रहा है। इजरायल-अमेरिका के हमले में मारे गए सुप्रीम लीडर अली खामनेई के उत्तराधिकारी के चयन के लिए तेहरान में 24 घंटे के नोटिस पर आपात बैठक बुलाई गई। रविवार को बैठक खत्म होने के बाद सोमवार को नए सुप्रीम लीडर का नाम घोषित किया गया।
खुद राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बताया कि खामेनेई के पुत्र मोज़तबा होसैनी खामनेई अब नए सुप्रीम लीडर होंगे। कई सूत्रों का दावा है कि 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन हुए हमले में मोजतबा ने अपने माता-पिता ही नहीं, बल्कि पत्नी और एक बेटे को भी खो दिया। उनकी एक बहन, बहनोई, एक भांजा और एक भांजी भी इजरायली हमले में मारे गए, ऐसी सूचना दी गई है।
परिजनों का बड़ा हिस्सा खोकर ही मोजतबा सत्ता की कुर्सी पर बैठे हैं मानो सिर पर कांटों का ताज।
रविवार को तेहरान में बैठक के दौरान ही इजरायली सेना ने चेतावनी दी थी कि जो भी ईरान का सुप्रीम लीडर बनेगा, उसे निशाना बनाया जाएगा। ट्रंप ने भी खुली धमकी दी है कि हमारी अनुमति के बिना अगर ईरान सुप्रीम लीडर चुनता है, तो हम उसे नहीं मानेंगे। वह ज्यादा दिन टिक भी नहीं पाएगा।
ईरान के नेतृत्व चयन में अमेरिका की दखलअंदाजी स्वीकार नहीं की जाएगी। चीन इसका संकेत पहले ही दे चुका है । वहीं आज वलादिमिर पुतिन ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता को बधाई दी। हालांकि मोजतबा की नियुक्ति पर ट्रंप ने असंतोष जताया है।
‘एपिक मिस्टेक’
उधर संघर्ष का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। पड़ोसी देशों पर हमलों के कारण आज रियाद ने ईरान की कड़ी निंदा की। सऊदी अरब का कहना है कि अगर तनाव और बढ़ा, तो ईरान को ही भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
कतर का दावा है कि सिर्फ सोमवार को ही उसने ईरान के कम से कम 17 बैलिस्टिक मिसाइल और 6 ड्रोन इंटरसेप्ट किए। वहीं यूक्रेन ने कहा कि ईरानी ड्रोन को रोकने के लिए पश्चिम एशिया और यूरोप के कम से कम 11 देशों ने उससे मदद मांगी है।
सूत्रों के अनुसार बहरीन में भी ईरान ने नए हमले शुरू कर दिए हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार कई मिसाइलें वहां गिरीं और दिनभर सायरन बजते रहे। संयुक्त अरब अमीरात में भी ईरान ने एक साथ ड्रोन और मिसाइल हमले किए।
हालांकि एक राहत की खबर यह है कि सऊदी अरब में एक भारतीय नागरिक की मौत की जो खबर फैली थी, उसे वहां के भारतीय दूतावास ने गलत बताया है।
उधर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि ईरान की मिसाइल और नौसेना क्षमता को नष्ट करना ही उनका एकमात्र उद्देश्य है। इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि हमारे तेल डिपो या परमाणु सुविधाओं पर हमले की कोशिश को हम किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे। आखिरी बार अमेरिका को चेतावनी दे रहे हैं। अगर ‘एपिक मिस्टेक’ ऑपरेशन बंद नहीं हुआ, तो हम और भी जोरदार जवाब देंगे। हमारे भंडार में अभी और भी कई चौंकाने वाली चीजें हैं।