प्रोटीन शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। यह मांसपेशियों के निर्माण, ऊतक मरम्मत, हार्मोन और एंजाइम निर्माण तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है लेकिन शरीर में प्रोटीन की आवश्यकता पूरी करने के लिए केवल प्रोटीन युक्त भोजन लेना पर्याप्त नहीं है बल्कि उसका समय भी महत्वपूर्ण है। प्रोटीन कब खाना चाहिए?
जो लोग नियमित जिम करते हैं या फिटनेस के प्रति सजग हैं, उनके बीच 'प्रोटीन टाइमिंग' को लेकर विभिन्न मत हैं। हालांकि हाल की शोध कहती है कि प्रोटीन कब खाया जा रहा है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि दिनभर में कुल कितनी प्रोटीन ली जा रही है।
प्रोटीन कब खाना चाहिए?
अधिकांश लोगों का मानना है कि व्यायाम के तुरंत बाद प्रोटीन लेना चाहिए, नहीं तो मांसपेशियां ठीक से नहीं बनेंगी। वहीं कुछ लोग सुबह उठते ही प्रोटीन लेने को सबसे अच्छा मानते हैं लेकिन वैज्ञानिक कहते हैं कि सामान्य लोगों के लिए यह समय निर्धारण इतना महत्वपूर्ण नहीं है। अगर पूरे दिन पर्याप्त प्रोटीन लिया जाए, तो मांसपेशियों के निर्माण और शरीर के सामान्य कार्यों के लिए वह पर्याप्त है।
प्रोटीन खाने का उपयुक्त समय?
जो लोग भारी व्यायाम करते हैं या एथलीट हैं, उनके लिए प्रोटीन खाने का समय कुछ हद तक महत्वपूर्ण हो सकता है। व्यायाम के बाद प्रोटीन लेने से मांसपेशियों की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं जल्दी मरम्मत होती हैं और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिलती है। पहले माना जाता था कि व्यायाम के बाद केवल 30 मिनट का 'एनाबोलिक विंडो' होता है, जिसमें प्रोटीन लेने से सबसे अधिक लाभ होता है लेकिन नई शोध कहती है कि यह समय कुछ घंटों तक विस्तारित हो सकता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि दिन में एक बार बहुत सारा प्रोटीन लेने से बेहतर है कि इसे विभिन्न समयों में विभाजित करके लिया जाए। यानी नाश्ता, दोपहर का भोजन, रात का भोजन और बीच-बीच में स्नैक्स, हर भोजन में कुछ प्रोटीन शामिल हो, तो शरीर उसे अच्छे से उपयोग कर सकता है। इससे मांसपेशियों की रक्षा, ऊर्जा बनाए रखना और वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
इसके अलावा प्रोटीन के स्रोत भी महत्वपूर्ण हैं। अंडा, मछली, मांस, दूध, दही, पनीर, दाल, सोयाबीन, मेवा आदि प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। शाकाहारी या मांसाहारी, दोनों प्रकार के भोजन से पर्याप्त प्रोटीन प्राप्त किया जा सकता है।