नई दिल्ली : देश में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अत्याचार और अपराध के मामले अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं। सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि वर्ष 2023 में ऐसे 57 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2023 में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अत्याचार और अपराध के कुल 57,789 मामले दर्ज हुए।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 में ऐसे 57,582 मामले सामने आए थे। वहीं 2021 में यह संख्या 50,900 थी। इससे पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में मामलों की संख्या बढ़ी है।
रामदास अठावले ने कहा कि मामलों की संख्या बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। लोगों में जागरूकता बढ़ी है। कानून के बारे में जानकारी भी पहले से ज्यादा हुई है। पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें इस तरह के मामलों में संवेदनशील बनने के लिए भी तैयार किया जा रहा है। इन कारणों से अब अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में फिलहाल किसी नए संशोधन का प्रस्ताव नहीं है।
मंत्री ने बताया कि इस कानून में पहले ही बदलाव किए जा चुके हैं। वर्ष 2016 और 2018 में इसमें संशोधन किया गया था। इन संशोधनों का उद्देश्य कानून को और सख्त बनाना था।
सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसलिए अभी इसमें नया बदलाव करने की जरूरत नहीं है। सरकार का जोर कानून को सही तरीके से लागू करने पर है।