कोलकाता: पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर अब भारत के रेस्तरां उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका-इजराइल हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियां प्रभावित होने से एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। सरकार ने घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता दी है, जिसके कारण होटल और रेस्तरां के लिए कमर्शियल एलपीजी की कमी गहराती जा रही है।
इसका असर देशभर के कई शहरों में दिखने लगा है-कहीं मेन्यू छोटा किया जा रहा है, तो कहीं होटल सीमित समय के लिए ही खाना परोस रहे हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो कई रेस्तरां को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।
आयात पर निर्भरता से बढ़ी चुनौती
भारत में एलपीजी की सालाना खपत करीब 31.3 मिलियन टन है। इसमें से लगभग 87 प्रतिशत घरेलू रसोइयों में और करीब 13 प्रतिशत होटल-रेस्तरां जैसे कमर्शियल क्षेत्रों में इस्तेमाल होता है।
देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 62 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, जिसमें से 85-90 प्रतिशत आपूर्ति सऊदी अरब और कतर जैसे पश्चिम एशिया के देशों से आती है। वर्ष 2025 में भारत ने करीब 23.3 मिलियन टन एलपीजी आयात की थी।
हालिया भू-राजनीतिक तनाव के कारण कई राज्यों में कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे रेस्तरां उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है।
देशभर में दिखने लगा असर
कोलकाता में भी शहर के लगभग 5,000 रेस्तरां में से 40 प्रतिशत तुरंत संकट का सामना कर रहे हैं, जबकि 30-40 प्रतिशत के पास सिर्फ कुछ दिनों का स्टॉक बचा है।
तमिलनाडु के कई लोकप्रिय रेस्तरां चेन के मालिकों का कहना है कि उनके पास सिर्फ एक-दो दिन का गैस स्टॉक बचा है। चेन्नई के एक बड़े होटल ने गैस की बचत के लिए फ्राइड राइस, साइड डिश और अप्पम जैसे व्यंजन बनाना बंद कर दिया है।
मुंबई में इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (AHAR) के अध्यक्ष विजय शेट्टी के अनुसार, शहर में लगभग 20 प्रतिशत होटल पहले ही बंद हो चुके हैं। वहीं महाराष्ट्र के खाद्य मंत्री छगन भुजबल ने भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में कमर्शियल एलपीजी की कमी और बढ़ सकती है।
दिल्ली में फिलहाल स्थिति कुछ बेहतर बताई जा रही है, हालांकि कई रेस्तरां पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी कर रहे हैं। बेंगलुरु, लखनऊ, पुडुचेरी, भुवनेश्वर और ओडिशा के अन्य शहरों में भी कई होटल कुछ आइटम परोसना बंद कर चुके हैं।
“लो-फ्यूल मेन्यू” की मजबूरी
गैस बचाने के लिए कई रेस्तरां अब “लो-फ्यूल मेन्यू” अपनाने लगे हैं। पूड़ी, डोसा, चाय-कॉफी जैसे रोजमर्रा के व्यंजनों को सीमित किया जा रहा है। दिल्ली के कुछ रेस्तरां इलेक्ट्रिक उपकरणों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। होटल मालिकों का कहना है कि कई पारंपरिक भारतीय व्यंजन-जैसे दाल मखनी, राजमा, बिरयानी, निहारी और कोरमा-लंबे समय तक धीमी आंच पर पकते हैं और बिजली के चूल्हे पर वही स्वाद नहीं मिल पाता।
पुडुचेरी में कुछ होटलों ने गैस बचाने के लिए सिर्फ शाम 4 से 7 बजे तक चाय-कॉफी और जूस बेचने का फैसला किया है।
रोजगार और पर्यटन पर खतरा
रेस्तरां उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। ओडिशा होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (HRAO) की चेयरपर्सन जे.के. मोहंती ने चेतावनी दी कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो होटल बंद होने लगेंगे। इसके साथ ही बुकिंग रद्द होंगी और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उनके अनुसार, सिर्फ ओडिशा में ही करीब 50,000 लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एलपीजी आयात के वैकल्पिक स्रोत-जैसे रूस या अफ्रीकी देश-जल्द सक्रिय नहीं किए गए तो संकट और गहरा सकता है।
फिलहाल सरकार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस आपूर्ति को प्राथमिकता दे रही है, जबकि होटल और रेस्तरां उद्योग कमर्शियल सप्लाई बहाल करने की मांग कर रहा है। उद्योग की नजर अब इस बात पर टिकी है कि स्थिति कब सामान्य होगी। लंबे समय तक ठंडी रसोई का मतलब पूरे उद्योग के लिए गंभीर संकट हो सकता है।