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म्यूचुअल फंड में निवेश की सुरक्षा के लिए सेबी का नया कदम

सभी निवेशकों को एक विशेष ‘वॉलंटरी लॉक-इन’ या ‘डेबिट-फ्रीज’ की सुविधा देने की ओर अग्रसर।

मुंबई : आंकड़े बताते हैं कि 2025 में भारत के म्यूचुअल फंड में देशवासियों के निवेश की एसेट अंडर मैनेजमेंट की राशि सालाना आधार पर 21% बढ़कर 80.23 लाख करोड़ रुपये हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक 2025 में देश में 64 लाख नए यूनिक निवेशक बाजार में आए, जिससे कुल निवेशकों की संख्या बढ़कर लगभग 5.90 करोड़ तक पहुंच गई है।

इतनी बड़ी संख्या में म्यूचुअल फंड निवेशकों की मेहनत की कमाई की सुरक्षा को लेकर देश की शेयर बाजार नियामक संस्था सेबी और साथ ही आरबीआई भी स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं।

इसी कारण म्यूचुअल फंड निवेशकों को एक नए सुरक्षा जाल में लपेटने का फैसला सेबी ने लिया है। इसके तहत सभी निवेशकों को एक विशेष ‘वॉलंटरी लॉक-इन’ या डेबिट-फ्रीज की सुविधा दी जाएगी। इसके तहत अगर किसी संदिग्ध लेन-देन की आशंका होती है, तो निवेशक अपने म्यूचुअल फंड फोलियो से होने वाले किसी भी विदड्रॉल या डेबिट ट्रांजैक्शन को अस्थायी रूप से बंद कर सकेंगे।

फ्रीज रहने के दौरान उस फोलियो से किसी भी यूनिट को रिडीम नहीं किया जा सकेगा, स्विच नहीं किया जा सकेगा, यानी कुल मिलाकर जब तक संबंधित ग्राहक स्वयं उस लॉक को नहीं खोलते, तब तक किसी भी प्रकार का डेबिट नहीं हो सकेगा।

अधिकारियों की ओर से बताया गया है कि डी-मैट और नॉन-डीमैट, दोनों तरह के खातों में यह सुविधा उपलब्ध होगी। इस लॉक सुविधा को लागू करने के लिए शुरुआती तौर पर इंटर-ऑपरेबल डिजिटल प्लेटफॉर्म MF Central को चुना गया है। यह एक ऑनलाइन ट्रांजैक्शन प्लेटफॉर्म है, जहां से ग्राहक अपने म्यूचुअल फंड से जुड़े सभी लेन-देन कर सकते हैं।

यह व्यवस्था कैसे काम करेगी?

सेबी के नए निर्देश के अनुसार हर म्यूचुअल फंड हाउस को अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप में एक विशेष लिंक या विकल्प देना होगा। अगर किसी निवेशक को लगता है कि उसके खाते में कोई संदिग्ध गतिविधि हो रही है, तो वह खुद ही अपने फोलियो को फ्रीज यानी अस्थायी रूप से बंद कर सकेगा।

इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए निवेशकों को ऑनलाइन पोर्टल के साथ-साथ कॉल सेंटर की सुविधा भी दी जा सकती है।

एक बार निवेशक अपना खाता फ्रीज कर देता है और बाद में उसे भरोसा हो जाता है कि अब किसी खतरे की आशंका नहीं है, तो वह इसे फिर से चालू कर सकेगा। हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर इसे खोलना फ्रीज़ करने जितना आसान नहीं होगा। दोबारा लेन-देन शुरू करने के लिए निवेशक को फिर से KYC सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि खाते को दोबारा चालू करने की मांग वास्तव में उसी के असली मालिक ने की है।

सेबी ने सभी फंड हाउस और रजिस्ट्रार एवं ट्रांसफर एजेंटों को निर्देश दिया है कि 30 अप्रैल 2026 तक इस तकनीकी ढांचे को पूरी तरह तैयार कर लिया जाए।

इस व्यवस्था के लागू होने से आम निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ेगा। अगर किसी निवेशक को कोई संदिग्ध संदेश या ईमेल मिलता है, तो वह तुरंत अपने मेहनत की कमाई को सुरक्षित कर सकेगा। इससे करोड़ों लोग संभावित बड़े वित्तीय नुकसान से बच सकेंगे।

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