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RBI के SGS नीलामी में वित्तीय जरूरतों के लिए राज्यों ने लिया 45,960 करोड़ रुपये उधार

मध्य प्रदेश ने 21 साल की अवधि वाली सिक्योरिटीज से 5 हजार 800 करोड़ रुपये उधार लिया है।

By राखी मल्लिक

Mar 10, 2026 16:42 IST

नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक ने आज घोषणा की कि कई राज्य सरकारों ने स्टेट गवर्नमेंट सिक्योरिटीज की नीलामी के माध्यम से कुल 45,960 करोड़ रुपये उधार लिए हैं।

नीलामी में भाग लेने वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश ने तीन सिक्योरिटीज के जरिए 3 हजार करोड़ रुपये जुटाए। जिनकी अवधि 13, 15 और 17 साल है। अरुणाचल प्रदेश ने 20 साल की अवधि वाली सिक्योरिटी से 190 करोड़ रुपये उधार लिए, जबकि असम ने 15 साल की अवधि वाली सिक्योरिटी के माध्यम से 900 करोड़ रुपये लिए। दिल्ली ने 10 साल की सिक्योरिटी के जरिए 1 हजार करोड़ रुपये जुटाए।

गुजरात ने दो सिक्योरिटीज के जरिए 2 हजार करोड़ रुपये जुटाए, जिनकी अवधि 7 साल 6 महीने और 11 साल थी। प्रत्येक में अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये की उधारी की सुविधा। हरियाणा ने 4, 12 और 18 साल की अवधि वाली सिक्योरिटीज के जरिए 3 हजार करोड़ रुपये जारी किए। वहीं, जम्मू और कश्मीर ने 15 साल की अवधि वाली सिक्योरिटी से 900 करोड़ रुपये उधार लिए।

नीलामी में सबसे बड़ा उधारकर्ता कर्नाटक रहा, जिसने नए सिक्योरिटीज और री-इश्यू के मिश्रण से 10 हजार करोड़ रुपये जुटाए। इसमें 7.31% कर्नाटक स्टेट गवर्नमेंट सिक्योरिटीज 2033, 7.38% कर्नाटक SGS 2034 और 7.48% कर्नाटक SGS 2037 के री-इश्यू शामिल हैं।

अन्य भाग लेने वाले राज्यों में केरल ने 23 साल की अवधि वाली सिक्योरिटी से 1 हजार करोड़ रुपये, जबकि मध्य प्रदेश ने 10, 14 और 21 साल की अवधि वाली सिक्योरिटीज से 5,800 करोड़ रुपये उधार लिए।

छोटे जारीकर्ता राज्यों में मिजोरम ने 15 साल की सिक्योरिटी से 120 करोड़ रुपये और सिक्किम ने 10 साल की सिक्योरिटी से 250 करोड़ रुपये जुटाए।

पंजाब ने नवंबर 2022 में जारी 7.62% पंजाब SGS 2032 का री-इश्यू करके 2,000 करोड़ रुपये जुटाए। तमिलनाडु ने नए जारी और री-इश्यू सिक्योरिटीज के मिश्रण के माध्यम से 8 हजार करोड़ रुपये उधार लिए। जिसमें 7.23% तमिलनाडु SGS 2033 और 7.63% तमिलनाडु SGS 2056 शामिल हैं।

इसके अलावा, त्रिपुरा ने 15 साल की सिक्योरिटी से 800 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश ने 2037, 2041 और 2046 में परिपक्व होने वाली सिक्योरिटीज का री-इश्यू करके 3,500 करोड़ रुपये, और पश्चिम बंगाल ने 18 और 22 साल की अवधि वाली सिक्योरिटीज के जरिए 3,500 करोड़ रुपये उधार लिए।

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