नई दिल्ली : घरेलू 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई। जिसके बावजूद भारत में एलपीजी की कीमतें कई पड़ोसी देशों की तुलना में अब भी कम हैं। इस मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी।
शनिवार को 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत लगभग 913 रुपये हो गई है। वहीं पाकिस्तान में यह करीब 1 हजार 46 रुपये, श्रीलंका में लगभग 1 हजार 241 रुपये और नेपाल में करीब 1 हजार 207 रुपये है।
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार इस बढ़ोतरी का मतलब है कि एक परिवार के लिए खाना पकाने का खर्च प्रतिदिन लगभग 80 पैसे बढ़ा है, यानी प्रति व्यक्ति करीब 20 पैसे प्रतिदिन की वृद्धि हुई है।
यह संशोधन वैश्विक एलपीजी कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच किया गया है। अधिकारियों के अनुसार यह एक संतुलित कदम है जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं की सुरक्षा के साथ-साथ तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिरता को बनाए रखना है।
सूत्रों के अनुसार हालिया बढ़ोतरी के बावजूद घरेलू एलपीजी की कीमतें अभी भी बाजार आधारित कीमतों से कम हैं। 6 मार्च 2026 को दिल्ली में 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की बाजार आधारित कीमत लगभग 987 रुपये थी, जबकि उपभोक्ताओं को यह 853 रुपये में मिल रहा था। यह बाजार मूल्य से लगभग 134 रुपये कम था।
कीमत निर्धारण के अनुसार सिलेंडर की कीमत में लगभग 134 रुपये की वृद्धि की संभावना थी, लेकिन सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केवल 60 रुपये की ही बढ़ोतरी को मंजूरी दी और बाकी बोझ खुद वहन किया।
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए खाना पकाने के खर्च पर इसका असर सीमित है। अनुमान के अनुसार पीएमयूवाई परिवार के लिए एलपीजी से खाना पकाने का दैनिक खर्च लगभग 7.31 रुपये से बढ़कर 8.11 रुपये हो गया है, यानी प्रतिदिन 1 रुपये से भी कम की वृद्धि।
भारत अपनी एलपीजी आवश्यकता का 60 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, इसलिए घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय मानकों, जैसे सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस से जुड़ी रहती हैं। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक एलपीजी कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है।
2020-21 में यह कीमत लगभग 415 डॉलर प्रति मीट्रिक टन थी, जो 2022-23 में बढ़कर करीब 712 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गई। इसके बावजूद सरकार ने पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला।
सरकार और तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू एलपीजी को सस्ता बनाए रखने के लिए काफी नुकसान भी उठाया है। 2024-25 में ओएमसी को लगभग 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि सरकार ने आपूर्ति बनाए रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए करीब 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी।
इसके अलावा सरकार ने 2022-23 में भी ओएमसी को लगभग 22,000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया था, ताकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में घरेलू एलपीजी सस्ती रखी जा सके।