कोलकाताः महानगर की साहित्यिक संस्था बंगीय हिंदी परिषद् द्वारा रविवार को कविकल्प की गोष्ठी एवं पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ। प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अरुण प्रकाश मल्लावत एवं प्रधान वक्ता के रूप में डॉ. सत्यप्रकाश तिवारी उपस्थित थे। इस सत्र में डॉ. उमेश चंद्र पांडेय की पुस्तक ‘समय की प्रतिध्वनि’ का विमोचन किया गया। दोहों और मुक्तकों से समृद्ध इस पुस्तक की उपस्थित विद्वानों ने सराहना की। प्रधान वक्ता ने इसे समय का दस्तावेज बताया और निर्भीक अभिव्यक्ति के लिए कवि की सराहना की। अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. त्रिपाठी ने पुस्तक से चुनिंदा दोहों को उद्धृत किया और समय के साथ कृति की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।स्वागत वक्तव्य में परिषद् के मंत्री डॉ. राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने उपस्थित श्रोताओं का स्वागत किया। डॉ. उमेश चंद्र पांडेय ने पुस्तक की रचना यात्रा के अपने अनुभवों को साझा किया और साहित्य जगत को अपनी कृति समर्पित की। द्वितीय सत्र में कविकल्प का आयोजन हुआ जो महिला दिवस के उपलक्ष्य में महिलाओं को समर्पित रहा। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. शिप्रा मिश्रा ने की। प्रधान अतिथि के रूप में वंदना पाठक तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. उर्वशी श्रीवास्तव एवं सुषमा राय पटेल उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में उमेश पांडेय, भागीरथ सारस्वत, सुरेंद्र सिंह, मंजू तिलक, नंदलाल रोशन, चन्द्रिका प्रसाद अनुरागी, मनोज मिश्र, गजेंद्र नाहटा, कमल पुरोहित, रामपुकार सिंह गाजीपुरी, श्रीमोहन तिवारी, सुशील तिवारी, प्रवेश पटियालवी, लक्ष्मी कुमार जायसवाल, चन्द्रकिशोर चौधरी, रवीन्द्र श्रीवास्तव, सियाली गुप्ता,शंकर गुप्ता,नजीर राही, कमलापति पांडेय निडर, विश्वजीत शर्मा, ब्रजबिहारी द्विवेदी, अजीत साव, जातिब हयाल, रमेश शर्मा, नेहा साव, एवं रीता मुखर्जी उपस्थित थे। प्रथम सत्र का संचालन पुष्पा मिश्रा ने तथा द्वितीय सत्र का संचालन प्रदीप कुमार धानुक ने किया।धन्यवाद ज्ञापन क्रमश: डॉ. शिप्रा मिश्रा तथा डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने किया।
बंगीय हिंदी परिषद् द्वारा कविकल्प की गोष्ठी एवं पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन
डॉ. उमेश चंद्र पांडेय की पुस्तक ‘समय की प्रतिध्वनि’ का विमोचन किया गया।
बंगीय हिंदी परिषद् की कविकल्प गोष्ठी की तस्वीर