कोलकाताः धर्मतल्ला स्थित मेट्रो चैनल पर एसआईआर प्रक्रिया में लाखों मतदाताओं के नाम काटे जाने के खिलाफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना चौथा दिन सोमवार को भी जारी रहा। इस दिन सबसे ज्यादा तृणमूल समर्थकों और नेताओं की भीड़ देखी गई। बंगाल के कोने-कोने से लोग धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं, इसी बीच एक ऐसे शख्स को देखा गया जो लोगों का ध्यान खींच रहा था। उस व्यक्ति के दोनों हाथ जंजीरों से जकड़े हुए थे और पैऱों में बेड़ियां थी। व्यक्ति के शरीर पर कई छोटे-छोटे बोर्ड लटके हुए थे जिसपर लिखा था-बीएलओ। इस शख्स के पीछे तृणमूल के दर्जनों समर्थक चल रहे थे और निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे। आखिर इस रुप में क्यूं ? शख्स से सवाल करने पर उसने बताया कि एक तरफ आम लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं, दूसरी तरफ बीएलओ पर काम का ऐसा बोझ डाला गया कि कई बीएलओ को खुदकशी करने की भी नौबत आई। बीएलओ की हालत कैसी हो गई है, यह जनता को दिखाने के लिए उसने ऐसा तरीका अपनाया है। उसके साथी पार्टी समर्थकों का कहना है कि केंद्र सरकार की यह साजिश तृणमूल कभी सफल होने नहीं देगी। जरूरत पड़ने पर आंदोलन और बड़ा हो सकता है।
वहीं सोमवार को निर्वाचन आयोग की ओर से सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी जिसमें तृणमूल की ओर से मंत्री व कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम, मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और राज्यसभा के उम्मीदवार राजीव कुमार पहुंचे थे। बैठक से लौटने के बाद इन नेताओं का कहना है कि बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तृणमल नेताओं की बात ही नहीं सुन रहे थे। वे अपनी बाच पर अड़े रहे। तृणमूल नेताओं को आशंका है कि मतदाता सूची से नाम काटे जाने को लेकर तृणमूल सुप्रीम कोर्ट की ओर रूख किया था, जिसकी वजह से ज्ञानेश कुमार तृणमूल से नाराज हैं लेकिन तृणमूल आम मतदाताओं के लिए ही लड़ाई लड़ रही है।
एक ही चरण में वोटिंग करनी होगी, अधिकतम दो चरणों में, आयोग के समक्ष सीपीएम का आवोदन
चुनाव आयोग की फुल बेंच के साथ बैठक के बाद राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा, 'एक ही चरण में वोटिंग करनी होगी। अधिकतम दो चरणों में। चुनाव आयोग ने ऐसा क्यों किया कि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने के दौरान लोगों का नाम हटाना पड़ा ? 60 लाख वोटरों को छोड़ कर वोटर लिस्ट नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि BLO, ERO, AERO द्वारा यह काम करते समय सरसों में भूत आ गया। जिन्होंने गलती की, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो रही है ? निष्पक्ष वोटिंग कैसे कराई जा सकती है ? मतुआ, आदिवासी, अल्पसंख्यकों का क्या होगा ? हमने विशेष तौर पर यही मांग की है।'