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ईरान युद्ध से ऊर्जा और व्यापार पर बड़े असर की आशंका, एस. जयशंकर ने संसद में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया

संसद में युद्ध के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जतायी

नयी दिल्लीः पश्चिम एशिया में युद्ध अपने चरम पर है। ईरान और इज़राइल-अमेरिका के बीच युद्ध लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। इस संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर पड़ने की आशंका है। खासकर ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। तेहरान के आसपास स्थित महत्वपूर्ण तेल और ईंधन भंडारों पर इज़राइल के हमलों ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है।

सोमवार को संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत में विपक्ष के हंगामे के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने युद्ध की स्थिति पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने मानवीय आधार पर ईरानी जहाज़ों को आश्रय देने, संभावित ऊर्जा संकट, और युद्धग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों की वापसी जैसे मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी।

सोमवार को राज्यसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा, “पश्चिम एशिया के इस युद्ध को लेकर भारत में चिंता है। लेकिन बातचीत और कूटनीति के जरिए इस युद्ध को रोकना चाहिए। क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ रहा है।”

उन्होंने कहा कि ईंधन आपूर्ति, समुद्री जहाज़ों के मार्ग और वैश्विक व्यापार पर युद्ध का प्रभाव चिंताजनक है। सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और संभावित प्रभावों का आकलन कर रही है। जयशंकर के अनुसार भारत के राष्ट्रीय हित-खासकर ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय उपभोक्ताओं का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता होंगे।

विदेश मंत्री ने संसद में यह भी बताया कि 20 फरवरी को भारत सरकार ने एक बयान जारी कर गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि 1 मार्च को भारत ने ईरान के तीन जहाज़ों को भारतीय बंदरगाहों में प्रवेश की अनुमति दी, जिनमें से एक जहाज़ केरल के कोच्चि बंदरगाह पर है। संकट में फंसे जहाज़ों को आश्रय देने के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत को धन्यवाद भी दिया है। जयशंकर ने यह भी कहा कि इस समय शीर्ष नेतृत्व से संपर्क बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।

साउथ ब्लॉक के अनुसार पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। विदेश मंत्री ने संसद को बताया कि इस बढ़ते तनाव के बीच करीब 67,000 भारतीय नागरिकों को पश्चिम एशिया से वापस लाया गया है। सरकार वहां फंसे सभी भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

हालांकि, जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत ने पहले ही ईरान में रह रहे भारतीयों को वहां से निकलने की सलाह दी थी, लेकिन जिन्होंने उस सलाह को नहीं माना वही अभी वहां फंसे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद ईरान ने पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए, जिसके कारण बड़ी संख्या में भारतीय वहां फंस गए थे। अब हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुल गया है, लेकिन हवाई सेवाएं अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई हैं।

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